मोदी सरकार करेगी POCSO एक्ट में बदलाव – बलात्कारियों को मिलेगी अब फाँसी

 

NO MERCY TO RAPIST

बुधवार को मंत्रिमंडल की बैठक में बाल यौन उत्पीडन के बढ़ते अपराधों पर रोक लगाने के लिए यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून में जरूरी संशोधनों को मंजूरी दे दी गयी है| संशोधन में बाल पोर्नोग्राफी के मामलों में भी सजा के साथ जुर्माने का भी प्रावधान लाया गया है|

देश के बच्चे आने वाले कल में देश का भविष्य तय करते हैं| उनकी सही परवरिश, उनकी शिक्षा और मानसिक विकास सिर्फ उनके हित के लिए बल्कि देश हित में भी होती है| आज के बच्चे ही आने वाले कल में देश की रूपरेखा तैयार करते है| ऐसे में बच्चों के अभिभावक और साथ ही सरकार का काम होता है कि उन्हें एक सुरक्षित माहौल मिले जिसमें वो किसी भी तरह के तनाव अथवा परेशानी से मुक्त होकर आगे बढ़ सकें|

पर हमारे समाज में कुछ ऐसे तत्व हैं जो इन मासूमों का यौन उत्पीडन जैसे घिनौनी हरकत करते हैं| महज़ कुछ क्षणिक सुख के लिए ऐसे लोग एक मासूम की ज़िन्दगी को उसी के ऊपर बोझ बना देते हैं, और उसकी ज़िन्दगी को पूरी तरह से तहस-नहस करके रख देते हैं|

बच्चों के साथ यौन उत्पीडन के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई गयी| इस बैठक की अध्यक्षता खुद PM मोदी कर रहे थे| बैठक ख़त्म होने के बाद सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बातचीत में बताया कि बच्चों के प्रति अपराधों की गंभीरता को देखते हुए इससे निपटने के लिए पॉक्सो कानून में संशोधनों को मंजूरी दी गयी है|

इस संशोधन के अनुसार अब कानून में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों को मृत्युदंड देने का प्रावधान शामिल किया गया है| कानून में इतने दंडात्मक प्रावधान को लाने के पीछे सरकार का एक ही मकसद है कि किसी भी प्रकार यौन उत्पीडन के अपराधों पर अंकुश लगाया जाये ताकि बच्चों की ज़िन्दगी को बर्बाद होने से बचाया जा सके|

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जावडेकर का कहना था कि इस संशोधन की मंजूरी के पीछे सरकार की एक ही मंशा है कि यौन उत्पीडन से जूझ रहे बच्चों की सहायता की जाये और अन्य बच्चों की गरिमा और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाये|

सरकार ने अपनी पूरी कोशिश की है कि किसी भी प्रकार से बच्चों को यौन उत्पीडन से बचाया जाये| बच्चों के अभिभावकों को भी अपने बच्चों की परेशानियों को सुनना चाहिए| ऐसे मामलों में बच्चे अपनी बात किसी से कह नहीं पाते, ऐसे में अभिभावकों को चाहिए कि वो अपने बच्चे की हर हरकत पर नज़र रखें और अगर उनके स्वभाव में कुछ बदलाव नज़र आ रहा है, तो उन्हें इसके पीछे के कारण को जानने की कोशिश करनी चाहिए| साथ ही साथ अपने बच्चे को यौन उत्पीडन के बारे में भी नकारी देनी चाहिए|