महिला सुरक्षा को लेकर मोदी सरकार सजग सरकार

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Modi Cabinet Meeting

एक बार फिर से देश में महिला सुरक्षा को लेकर हाय तौबा मची है। सियासी तेवर भी खूब गर्म है, क्योकि उन्हे लग रहा है कि शायद इस मुद्दे को खीचने पर सत्ता पक्ष पर जनता उसी तरह से हावी हो जायेगी जैसे निर्भया केस में देखा गया था, लेकिन देश की जनता ये जानती है कि मोदी सरकार ने बलात्कार के आरोपियों के खिलाफ जिस तरह के सख्त कानून बनाये है, अगर ऐसे आजादी के तुंरत बाद बन गये होते तो समाज से आज ये बुराई खत्म हो गई होती।

women's safety

मोदी सरकार ने अपने घोषणा पत्र में महिला सुरक्षा का मजबूती से दावा किया था, सत्ता में आते ही मोदी सरकार ने इसके लिए काम भी शुरूकर दिया था जिसके चलते रेप की घटनाओं में सख्त सजा के प्रावधान का फैसला किया गया। कैबिनेट में इससे संबंधित प्रस्ताव पारित किया गया।

रेपिस्टों को मौत की सजा दिए जाने संबंधित अध्यादेश को मंजूरी दी गई। इसके लिए ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस’ यानी पॉक्सो कानून में जरूरी संशोधन किए गए। इससे संबंधित अध्यादेश राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास भेजा गया, जिसे उन्होंने महज 24 घंटे के अंदर मंजूरी दे दी गई।

नया कानून, नई सजा

1. पहले 12 साल तक की बच्ची से रेप करने वालों को कम से कम सात साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा मिलती थी,लेकिन नए कानून के तहत कम से कम 20 साल और अधिकतम फांसी की सजा का प्रावधान कर दिया गया है।

2. पहले 13 से 16 साल तक की बच्ची के साथ रेप करने वालों को कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा मिलती थी।अब नए कानून के तहत कम से कम 20 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान कर दिया गया है।

3. पहले किसी महिला के साथ रेप करने वालों को कम से कम 7 साल और अधिकतम उम्र कैद मिलती थी। अब कम से कम 10 साल और अधिकतम उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया है।

2 महीने में पूरी होगी सुनवाई

सजा के साथ साथ मोदी सरकार के नये अध्यादेश में ये भी किया गया है कि मामले कि सुनवाई 2 महीने के भीतर पूरी की जाये और आरोपी को सजा सुनाई जाये इसके लिये भारतीय दंड संहिता), साक्ष्य अधिनियम, आपराधिक दंड प्रक्रिया संहिता और यौन अपराधों से बाल सुरक्षा (पोक्सो) अधिनियम में 70 साल में पहली बार बदलाव किया गया है। जिसके बाद कई मामलो के नतीजे भी जल्द देखने को मिले है मध्यप्रदेश का रेप मामला हो जिसमे महज 1 महीने के भीतर ही अरोपियों को मौत की सुनाई गई।

इतना ही नही खुद पीएम ने समय समय पर दुराचार होने पर आवाज उठाई है। लालकिले से उन्होने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर बेटियों की तरह हर माँ बाप अपने बेटों से ये पूछे की वो कहा गये थे इसके सात बैठे थे तो शायद ये समाजिक बुराई अपने आप दूर हो जाये। समाज की ये बुराई कानून से कम हो सकती है लेकिन खत्म समाज के जागरूक होने पर ही हो सकती है। सरकार इस बाबत लगातार कुछ न कुछ जागरूक अभियान चलाती भी रहती है। ऐसे में देश के सियासी के जानकार हो या सियासत करने वाले राजनेता सभी को मिलकर इस बीमारी को दूर करने के लिये आगे आना पड़ेगा, तभी देश में एक बेहतर माहौल बनेगा।

 


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