कोरोना को लेकर एक्शन मोड में मोदी सरकार महज 3 दिन में लिये कई बड़े फैसले

कोरोना एक फिर से लोगों को अपना शिकार बनाने में लगा हुआ है लेकिन इस बीच कुछ दरबारी मीडिया और नेता मोदी सरकार पर हमलावर हो गये है और हर वक्त सिर्फ मोदी जी से ही सवाल करने में जुटे है कि आखिर सरकार कर क्या रही है। हालाकि ये अच्छी तरह से सब जानते हैं कि कोरोना को लेकर केंद्र ने राज्य सरकारों को कदम उठाने की छूट दे रखी है। हालाकि कोरोना को रोकने में वही राज्य ज्यादा नाकाम हो रहे है जो मोदी के उठाए कदमो में गलतियां निकालते थे लेकिन इसके बाद भी ऐसे लोगों को हम बताना चाहते है कि मोदी सरकार ने पिछले 3 दिनो कोरोना को रोकने के लिए 5 बड़े कदम उठाये हैं।

रेमडेसिविर के दाम को कम करने के साथ उत्पादन को दोगुना करने की कवायद

कोविड19 संक्रमित मरीज की स्थिति गंभीर होने पर अस्पतालों में रेमडेसिविर इंजेक्शन का इस्तेमाल हो रहा है। बीते कुछ दिनों से देश के कई हिस्सों में इसकी किल्लत की जानकारी सामने आने लगी। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने 14 अप्रैल को रेमडेसिविर इंजेक्शन के प्रोडक्शन को बढ़ाने की मंजूरी दे दी। रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने जानकारी दी कि प्रोडक्शन प्रति माह करीब लगभग 78 लाख शीशी तक बढ़ाई जाएगी। रेमडेसिविर के सात मैन्युफैक्चरर की मौजूदा क्षमता 38.80 लाख शीशी प्रतिमाह की है। इसके साथ ही सरकार ने कहा है कि इंजेक्शन की कीमत में भी कटौती की जाएगी।  मंत्रालय के मुताबिक, छह मैन्युफैक्चरर को 10 लाख शीशी प्रति माह की उत्पादन क्षमता वाले सात अतिरिक्त साइटों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी दी गई है। 30 लाख शीशी प्रति माह का उत्पादन भी शुरु होने वाला है। इससे प्रोडक्शन क्षमता लगभग 78 लाख शीशी प्रति माह हो जाएगी। सरकार रेमडे​सिविर के निर्यात पर रोक जारी रखेगी। मंत्रालय के मुताबिक, रेमडेसिविर बनाने वाली कंपनियों ने स्वेच्छा से इस सप्ताह के अंत तक इसकी कीमत घटाकर 3,500 रुपये प्रति शीशी से कम करने की बात कही है।

50,000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का होगा आयात

कोरोना मरीजों के लिए मेडिकल ऑक्सीजन के मामले सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने 15 अप्रैल को एक बड़ा फैसला किया। इसके तहत, केंद्र सरकार ने 50,000 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन का इम्पोर्टकरने का फैसला किया। जिससे कि देश कई राज्यों में अस्पतालों में ऑक्सीजन की भारी किल्लत को दूर किया जा सके।जानकारी के अनुसार, सरकार ने वैसे 12 राज्यों की पहचान करने पर काम शुरू किया है, जहां ऑक्सीजन की जरूरत सबसे ज्यादा है। वही दूसरी तरफ ऑक्सीजन के उत्पादन में भी तेजी लाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए कई स्टील की कंपनियों से बात भी सरकार ने शुरू कर दी है।

 

100 अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट पीएम केयर्स से होगा तैयार

केंद्र सरकार ने 15 अप्रैल को ही फैसला किया कि पीएम केयर्स फंड के तहत 100 नए अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किए जाएंगे। अस्पतालों को मेडिकल ऑक्सीजन की अपनी जरूरत पूरी करने में आत्मनिर्भर बनाने और मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए नेशनल ग्रिड पर दबाव घटाने के लिए सरकार ने यह फैसला किया है।

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हाफकिन इंस्टीट्यूट में भी बनेगी कोवैक्सीन

कोविड19 वैक्सीनेशन प्रोग्राम को तेज करने के लिए सरकार ने एक और अहम फैसला किया है। केंद्र सरकार ने मुंबई स्थित हाफकिन इंस्टीट्यूट को भारत बायोटेक और आईसीएमआर की बनाई वैक्सीन कोवैक्सीन को बनाने की अनुमति दे दी है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने 15 अप्रैल को खुद एक ट्वीट कर यह जानकारी दी। मुख्यमंत्री ठाकरे ने इस बारे में केंद्र सरकार से गुजारिश की थी। अभी इस वैक्सीन का निर्माण हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कर रही थी।

महज तीन दिन में विदेशी टीका को मिलेगी मंजूरी

कोरोना महामारी से निपटने के लिए सरकार वैक्सीनेशन प्रोग्राम को तेजी से प्रमोट कर रही है। हालांकि, इस बीच वैक्सीन की कमी के मामले सामने आए। इस बीच, वैक्सीनेशन की रफ्तार को बढ़ाने के लिए सरकार ने एक अहम फैसला किया। केंद्र सरकार ने 15 अप्रैल को ही विदेश में बनी कोरोना वैक्सीन को आवेदन के तीन दिन के भीतर देश में इमर्जेंसी इस्तेमाल की मंजूरी का फैसला किया है।इसके लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, विदेश में बनी वैक्सीन को आपात मंजूरी के साथ ही क्लिनिकल ट्रायल के लिए भी आवेदन करना होगा।  केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन इसके लिए सात दिनों के भीतर मंजूरी प्रदान करेगा। संबंधित कंपनी को परीक्षण के नतीजे सीडीएससीओ के सामने दिखाने होंगे। सरकार ने 13 अप्रैल को ऐलान किया था कि विदेशों में बनी उन सभी वैक्सीन को बिना क्लिनिकल ट्रायल के देश में मंजूरी मिलेगी जिन्हें अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप और जापान के ड्रग रेग्युलेटर से मंजूरी मिली हुई है या जो डब्ल्यूएचओ की आपात इस्तेमाल की सूची में शामिल हैं।

इसके बावजूद भी कुछ लोग अपनी सरकारो के काम को नहीं देख रहे है बल्कि मोदी जी क्या कर रहे है, मोदी जी क्या कर रहे है कि धुन लगा रहे है जबकि मोदी जी काम करने में जुटे है और ये सिर्फ राजनीति करने में लगे है।