मोदी सरकार रोजगार पहुंचाये आपके द्वार, मिलेगा 25 हजार कमाने का मौका 

कोरोना माहामारी से कोई भी वर्ग ऐसा नही है जो अछूता रहा हो ,क्या अमीर क्या गरीब या फिर मध्यम वर्ग के लोग हो सभी का इसके चलते भारी नुकसान हुआ है। खासकर जो लोग शहरों में दो रोटी के लिए आए मजदूर तो इन दिनों रोजगार न मिलने की वजह से मुसीबत झेल रहे हैं। लेकिन अब ऐसा नही होगा क्योंकि मोदी सरकार अब उन्हे उनके घर के पास ही पैसा कमाने का मौका देने जा रही है। गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ जिसमें गांव लौटे श्रमिक 25 हजार रूपये तक कमा सकते है।

रोजगार पहुंचेगा आपके द्वार

लॉकडाउन की वजह से आप गांव वापस लौटने के लिए मजबूर हुए हैं। गांव में आपके पास रोजगार नहीं है। तो कोई बात नहीं है। क्योंकि सरकार आपके लिए गांव तक रोजगार लेकर पहुंच रही है। बस आपको इसके लिये  सबसे पहले अपने गांव के मुखिया से मिलना होगा। वह आपका नाम ब्लॉक आफिस में भेजेंगे, साथ ही वे बताएंगे कि इस मजदूर के पास इस काम की विशेषज्ञता है। जिस अधार पर आपको काम दिया जायेगा। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की देखरेख में चलने वाले इस अभियान का काम राज्य सरकारों के हाथ में ही होगा। इसलिए काम पाने के इच्छुक व्यक्ति सीधे केंद्र सरकार से संपर्क साधने के बजाय अपने ब्लॉक या तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क में रहें। इसमें श्रमिकों को उनके स्किल के हिसाब से 25 सरकारी योजनाओं में काम मिलेगा। ये योजनाएं देश के 6 राज्यों में 116 जिलों में लागू की जा रही है। जिसकी शुरूआत खुद देश के प्रधान मोदी जी बिहार से करेंगे।

रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट का होगा काम

इस अभियान के जरिए ज्यादातर काम इलाके के पास रूरल इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट करने का होगा। मसलन गांव में सड़क बनाने से लेकर कुआं, तलाब सहित और भी कई काम होंगे जो इन लोगों से करवाये जाएंगे वो भी उन श्रमिकों के अनुभव और योग्यता के अधार पर जिससे उन्हे बेहतर वेतन दिया जा सके। खुद इस बाबत केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया है कि सरकार ने अगले 125 दिनों में 50 हजार करोड़ रुपये से ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ी ढांचागत संरचना को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखा है जिसमें शहर से वापस आये श्रमिकों को रोजगार के साथ इलाके का विकास भी हो सकेगा। जैसे  गांव का पंचायत भवन जर्जर हो गया है तो उसकी मरम्मत होगी। गांव में ही कृषि उपज के भंडारण के लिए भंडारागार आदि का निर्माण कराया जाएगा। गांव के नहर आदि में टूट-फूट हो गई हो तो उसे भी ठीक कराया जाएगा।

जिला प्रशासन के पास लिस्ट

केंद्र सरकार का कहना है कि जो मजदूर श्रमिक स्पेशल या राज्य सरकार द्वारा अन्य तरीके से गांव वापस भेजे गए हैं, उनके नाम की सूची पहले से ही सरकार के पास है। उसी सूची के आधार पर उन्हें काम दिलवाया जाएगा। जो व्यक्ति किसी शहर से पलायन कर पैदल या किसी अन्य साधन से अपने गांव पहुंचे हैं, उनकी सूची भी संबंधित जिला के जिलाधिकारी ने तैयार कर लिया है। तब भी, आप एक बार अपना नाम उस सूची में चेक कर लें तो बेहतर होगा। जिससे रोजगार मिलने में दिक्कत न आ सके इसके साथ साथ सरकार इस योजना के तहत गांव की महिलाओं को भी रोजगार देने के लिए आगे आयेगी।

इन राज्यों के जिले पहले दौर में शामिल

इस अभियान के तहत सरकार ने 6 राज्यों के 116 जिलों की पहचान की है। इन जिलों में करीब 67 लाख प्रवासी मजदूर वापस लौटे हैं। इन 116 जिलों में बिहार के 32, उत्तर प्रदेश के 31, मध्य प्रदेश के 24, राजस्थान के 22, ओडिशा के 4 और झारखंड के 3 जिले शामिल हैं। शुरूआती दौर में देखा गया है कि इन राज्यो के इन जिलो में प्रवासी भारतीय बड़ी तादाद में लौटे हैं इसलिये यहां से इस योजना की शुरूआत की जा रही है। जिसके बाद किसे धीरे धीरे पूरे देश में लागू की जायेगी। जिससे रोजी रोटी छोड़कर आये मजदूरों को काम की तलाश में भटकना न पड़े।

मतलब साफ है कि सरकार इस योजना के तहत एक पंथ दो काज करने जा रही है। एक तो इसके तहत गांवों में रुके काम पूरे होंगे और गांव तक विकास की रफ्तार पहुंचेगी तो दूसरी तरफ जो लोग रोजगार के लिए दूर दूर परदेश में भटकते थे वो अब अपने घर में रहकर ही अच्छा पैसा कमाकर अपना पालन पोषण करेंगे जिससे आत्मनिर्भर भारत का खाका खिंच सकेगा और नया भारत भी बनकर उभर सकेगा।