सीधे किसानों के खातों में उर्वरक सब्सिडी के पैसे डाल, मोदी सरकार ने बचाए 10,800 करोड़ रुपये

 

fertilizer subsidy money directly into farmers' accounts

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में हर स्तर पर भ्रष्टाचार का खात्मा किया जा रहा है और ये सिलसिला लगातार जारी है। अक्टूबर, 2017 में मोदी सरकार ने किसानों को दिए जाने वाले उर्वरक की सब्सिडी को डीबीटी के दायरे में ला दिया था। सरकार के इस योजना के कार्यान्वयन के पहले वर्ष में लगभग 10,800 करोड़ रुपये की बचत की है।

बृहस्पतिवार को जारी वैश्विक फर्म माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) के अध्ययन के मुताबिक कहा गया है कि उर्वरक डीबीटी ने उर्वरकों की आवाजाही, स्टॉक की आवश्यकता और उपलब्धता के वास्तविक समय पर निगरानी से पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है। इससे आपूर्ति में भी सुधार हुआ है और कागजी काम को आसान किया है।

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केंद्रीय उर्वरक मंत्रालय और नीति अयोग ने उर्वरकों डीबीटी के कार्यान्वयन का मूल्यांकन करने, प्रणाली की दक्षता का पता लगाने, चुनौतियों की पहचान करने और कार्रवाई योग्य समाधान प्रदान करने के लिए वैश्विक फर्म माइक्रोसेव कंसल्टिंग (एमएससी) को जिम्मा सौंपा। एमएससी ने एक बयान में कहा, ‘‘योजना के आरंभ के पहले साल में, डीबीटी-उर्वरक से भारत सरकार को 1.54 अरब डॉलर (सरकारी अनुमान के मुताबिक) कर बचत हुई है।’’

फर्म माइक्रोसेव कन्सल्टिंग द्वारा 2018 में कराए गए इस अध्ययन का योजना के कार्यान्वयन और प्रणाली की दक्षता का मूल्यांकन करना तथा इस क्षेत्र से जुड़ी चुनौतियों को पहचान कर उनका उचित समाधान उपलब्ध कराना था।

एमएससी के पार्टनर मितुल थापलियाल ने कहा, ‘‘ यह पहल रियल टाईम में उर्वरक की आवश्यकता, उपलब्धता एवं बिक्री और परिवहन पर निगरानी रखते हुए प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाती है। किसान इस नई प्रणाली को पसंद कर रहे हैं क्योंकि इससे उर्वरकों की उपलब्धता में सुधार हुआ है तथा उर्वरकों की ज़्यादा लागत वसूलने पर लगाम लगी है।’’ इस कार्यक्रम में सरकार उर्वरक कंपनी को सब्सिडी तभी जारी करती है, जब रीटेलर, आधार आधारित प्रमाणीकरण के माध्यम से किसानों को उर्वरक बेच चुका होता है। इस सर्वेक्षण के अनुसार आधार के बिना मैनुअल बिक्री और ‘एडजस्टेड’ लेनदेनों की संख्या का अनुपात जो पहले 21 फीसदी थी, वह अब कम होकर 13.0 फीसदी ही रह गया है।

मोदी राज में शुरू से ही भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति है। मोदी सरकार ने एक-एक कर भ्रष्टाचार के सभी रास्तों को बंद कर दिया है। सरकारी पैसे की लूट अब नहीं हो पाती है। पहले सरकारी मदद और सब्सिडी, पेंशन आदि का पैसा अपात्रों के हाथों में चला जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। डायरेक्ट बैलेंस ट्रांसफर यानि डीबीटी योजना के बाद से केंद्र सरकार द्वारा भेजा गया पैसा सीधे जरूरतमंद के हाथों में पहुंचने लगा है।

फिलहाल 54 मंत्रालयों की 434 योजनाएं डीबीटी के दायरे में है। आधार से जुड़ी इन योजनाओं के जरिए मार्च, 2018 तक केंद्र सरकार को 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है।