मोदी सरकार ने वायदा किया पूरा सिख दंगो के दोषियों को मिली सजा

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कहते है इंसाफ के घर मे देर है लेकिन अंधेर नही.. देर सवेर इंसाफ जरूर लोगों को मिलता है। इसका जीता जागता उदाहरण साल 1984 मे हुए सिंख दंगे। इस दंगे मे जिन लोगों के साथ अत्याचार हुआ था आज उनमे से 2 परिवार को जरूर सुकून मिला है क्योंकि 34 साल बाद इस दंगे मे मारे गये परिवार के दो सदस्यों के दोषियो को कोर्ट ने सजा सुनाई है.।

कोर्ट ने अपने फैसले में एक अभियुक्त को फांसी तो दूसरे को उम्रकैद की सजा सुनाई है।फैसला सुनाने के लिए तिहाड़ जेल के अंदर ही अदालत लगाई गई। अदालत ने यशपाल को फांसी और नरेश सहरावत को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में पहली बार किसी को मौत की सजा सुनाई गई है।

महिपालपुर में दो सिख युवकों की हत्या का मामला

कोर्ट ने 1 नवंबर 1984 को महिलापुर इलाके में दो सिख युवाओं की हत्या के आरोप में दो स्थानीय लोगों नरेश सहरावत, यशपाल सिंह को दोषी ठहराया था। इन अभियुक्तों पर घटना वाले दिन पीड़ित परिवार की दुकान में लूट करने, दंगा फैलाने, दो सिख युवकों को जिंदा जलाकर मारने, मृतकों के भाइयों पर जानलेवा हमला करने का दोष साबित हुआ था।

इस फैसले के बाद अब ये साफ हो गया है कि जो लोग उस वक्त ये कहते नजर आते थे कि एक बड़ा पेड़ गिरने से धरती फटती है और कई और लोगों की भी जान जाती है,ऐसे विचार रखने वालो की बोलती जरुर बंद होगी। इतना ही नही सिख दंगे की जांच मे इस तरह के विचार रखने वाले नेताओं ने अपने चेलो को बचाने के लिये खूब जोर लगाया तभी तो पहले पुलिस को इन दंगों के दोषियों के खिलाफ कोई सबूत हाथ न लगे थे और केस बंद कर दिया गया। उस वक्त उन परिवार के सदस्यों से पूछा जाये कि क्या आलम था तो वो यही कहते नजर आते थे कि वो तो खून के आंसू पी रहे थे।

लेकिन जब साफ नियत वाली मोदी सरकार सत्ता मे आई तो 2015 मे इस सिख दंगे की जांच के लिए एक एसआईटी गठित की गई जिसके बाद दंगों के दोषियों के खिलाफ सरकार को कई सबूत हाथ लेगे। और कोर्ट मे सुनवाई भी जल्द से जल्द की गई जिसके चलते ही इन लोगो को इतनी जल्दी इंसाफ मिल पाया है।

वरना अगर सत्ता मे कांग्रेस की ही सरकार होती तो इन मसूम लोगो को शायद ही न्याय मिल पाता था। लेकिन देर ही सही आज इन सिख समूदाय मे ये यकीन जरूर हुआ है कि कोई उनकी सुध रखने वाली सरकार है जो देर से ही सही पर इंसाफ जरूर उन्हे दिलायेगी.


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