सशक्त सेना, समृद्ध राष्ट्र की नींव रखती मोदी सरकार, सेना पर खर्च करने के मामले में भारत तीसरा देश बना  

एक वक्त था जब भारत के सेना के जवान बुलेट प्रूफ जैकेट और जूतों के लिए सरकार से गुहार लगा रहे थे और सरकार पैसे की कमी बताकर सेना की जरूरतों को पीछे कर दिया करती थी। अब आप समझ सकते होंगे कि उस वक्त जब ऐसे खास जरूरत के समानो को खरीदे में सरकार मुंह बनाती थी तो वो नये हथियार क्या खरीदने की तैयारी कर रही होगी। लेकिन फिर देश में सत्ता बदली और मोदी सरकार आई। जिसके बाद भारत आज अपनी सेना पर दुनिया में तीसरे नबंर का मुल्क बन गया है जो सबसे ज्यादा पैसा खर्च करता है।

भारत को 2 मोर्चों पर युद्ध का खतरा

भारत दो मोर्चों पर युद्ध के खतरे का सामना कर रहा है। एक तरफ चीन और दूसरी तरफ पाकिस्तान है। भारत 2020 से चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सीमा विवाद सुलझाने में लगा हुआ है। लेकिन इसके साथ साथ तेजी से अपनी सैन्य ताकत को भी बढ़ाने में लगा है। जिसके चलते भारत का 76.6 अरब डॉलर का सैन्य खर्च दुनिया में तीसरे स्थान पर है, इसके पहले अमेरिका और चीन का स्थान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का सैन्य खर्च 2020 से 0.9 प्रतिशत और 2012 से 33 प्रतिशत बढ़ा है। स्वदेशी हथियार उद्योग को मजबूत करने के लिए 2021 के सैन्य बजट में पूंजी परिव्यय 64 प्रतिशत निर्धारित किया गया था कि 2021 में कुल वैश्विक सैन्य खर्च वास्तविक रूप से 0.7 प्रतिशत बढ़कर 2,113 अरब डॉलर हो गया है। 2021 में पांच सबसे बड़े खर्च करने वाले देश अमेरिका, चीन, भारत, ब्रिटेन और रूस थे। इन देशों का कुल सैन्य खर्च 62 प्रतिशत था।

सेना पर खर्च करने के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है भारत, देखें  रिपोर्ट | NewsTrack Hindi 1

मेक इन इंडिया सामान पर जोर

इतना ही नहीं एक तरफ सरकार सेना को मजबूत बना रही है तो सेना में स्वदेशी हथियार पर भी बल दिया जा रहा है। जिसके चलते विदेशी निवेश की जगह देश में ही हथियार बनाये जा रहे है। कुछ दिन पहले ही सरकार ने रूस से और अमेरिका से हथियार खरीदने में कटौती की है। मेक इन इंडिया को बढ़ावा देने के लिए भारतीय सेना ने 14,000 करोड़ रुपये की स्वदेशी मिसाइल और हेलिकॉप्टर खरीदने का फैसला लिया है। मेक इन इंडिया के तहत भारतीय सेना आकाश-एस एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की दो रेजिमेंट और 25 उन्नत हल्के हलिकॉप्टर (एएलएच) की खरीदारी करेगी। इसके लिए सरकार के पास कुल 14000 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भेजा गया है।

मतलब एक तरफ सरकार सेना को नये नये हथियार दे रही है तो देश में सैन्य हथियारों को बनाने का बहुत बड़ा हब भी बना रही है जिससे सशक्त सेना, समृद्ध राष्ट्र की नींव और मजबूत हो रही है।