धारा 370 के बाद मोदी सरकार उठाने जा रही है एक और बड़ा कदम

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Modi government is going to take another big step

Modi 2.0 ने जब अपना कार्यभार संभाला तो सरकार से कई उम्मीदें थी। ऐसे में केंद्र सरकार ने अपने पहले 6 महीने में राम मंदिर, आर्टिकल 370, तीन तलाक और नया मोटर व्हीकल संशोधन कानून लाकर अपने इरादे स्पस्ट कर दिए है। अब मोदी सरकार एक और बड़ा कदम की तैयारी में है, जिसको कैबिनेट की मंजूरी भी मिल गयी है। आज हम आपको प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल लाने के फैसलों के बारे में बताने जा रहे हैं।

जिस तरह से संसद के पिछले सत्र में मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने का क्रांतिकारी फैसला लिया था, मोदी सरकार कुछ वैसा ही एक और बड़ा व क्रांतिकारी फैसला लेने की तैयारी में है। इस वक्त जारी संसद के शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार एक ऐसा बिल लाने जा रही है जो पास हो गया तो भारत के भविष्य की दिशा तथा दशा ही बदल जायेगी। उम्मीद जताई जा रही है कि जिस तरह से पिछले सत्र में दोनों सदनों से 370 को हटाने वाला बिल पास हुआ था, वैसे ही इस सत्र में भी ये बिल पास हो जाएगा।

जानकारी के मुताबिक़, इस सत्र के दौरान मोदी सरकार सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल लेकर आएगी। इस बिल का सीधा असर देश के सवा सौ करोड़ नागरिकों पर होगा। Citizenship Amendment Bill के तहत मोदी सरकार बाहर से आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी आदि धर्मों के लोगों को भारतीय नागरिकता देने जा रही है। सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल यानी नागरिकता संशोधन बिल का सबसे पहले सीधा असर असम में दिखाई देगा क्योंकि वहां NRC लागू हो चुकी है।

इससे पहले नागरिकता संशोधन बिल 19 जुलाई 2016 में लोकसभा में पेश किया गया था। बिल को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया और इसकी रिपोर्ट आने के बाद बिल को इसी साल 8 जनवरी को लोकसभा ने पारित कर दिया। हालांकि बिल राज्यसभा में नहीं जा सका और लोकसभा का कार्यकाल ख़त्म होने से बिल भी ख़त्म हो गया था।

नागरिकता संशोधन विधेयक को मोदी कैबिनेट की मंजूरी मिल जाने के बाद अब ये बिल कभी भी संसद के पटल पर रखा जा सकता है। बिल का विरोध कर रहे विपक्षी दलों ने इसे संविधान की भावना के विपरीत बताते हुए कहा है कि नागरिकों के बीच उनकी आस्था के आधार पर भेद नहीं किया जाना चाहिए। वहीं मोदी सरकार का कहना है कि पड़ोसी देशों से आने वाले 6 धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को शरण देना मोदी सरकार की सर्व धर्म समभाव की नीति का परिचायक है।

गौरतलब है कि बीते अगस्त में मानसून सत्र के दौरान सरकार ने जम्मू-कश्मीर पर लागू अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी कर दिया था। अब इस सत्र में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि उनका लक्ष्य नागरिकता संशोधन विधेयक को पास कराना है।

इस विधेयक में नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया। नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार, भारत की नागरिकता के लिए आवेदक का पिछले 14 साल में 11 साल तक भारत में निवास करना जरूरी है लेकिन संशोधन में इन तीन देशों से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी, और ईसाई समुदाय के लोगों के लिए इस 11 साल की अवधि को घटाकर छह साल कर दिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री शाह पिछले कुछ दिनों से नागरिकता संशोधन बिल से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ विधेयक के मसले पर बैठक कर रहे थे। शाह ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों के बारे में हितधारकों के साथ चर्चा की और इसके विभिन्न पहलुओं पर भ्रम दूर करने की कोशिश की।

सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश

उल्लेखनीय है कि भाजपा नेतृत्व ने नागरिकता संशोधन विधेयक को अनुच्छेद 370 हटाने जितना ही महत्वपूर्ण बताया है। यही कारण है कि इस बिल को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संसद में पेश किए जाने के दौरान सभी पार्टी सांसदों को सदन में मौजूद रहने के निर्देश जारी किए गए हैं।

 


  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •