नक्सल इलाकों में मोदी सरकार बहाने जा रहे विकास की गंगा

देश के कोने कोने तक विकास पहुंचे और कोई इससे वंचित ना रह जाये इसके लिये पीएम मोदी बिना रुके रात दिन जुटे हुए हैं। इसी के चलते अब सरकार ने नक्सल प्रभावित 7287 गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंचाने के साथ साथ हर गांव को सड़कों से जोड़ने के लिये लिया कई अहम फैसले।

पिछड़े इलाकों में विकास पहुंचाने में लगी सरकार

पिछले 7 सालों से नक्सल इलाकों में रहने वाले लोग विकास से वंचित ना रह जाये इसके लिये केंद्र सरकार इन इलाकों में सड़क,स्कूल और बिजली के बाद अब मोबाईल की बेहतर सुविधा हो इसके लिये काम करने जा रही है। मोदी सरकार ने इसके लिये कैबिनेट से मुहर भी लगा दी है। सरकार की माने तो पांच राज्यों के 7,287 गांवों में मोबाइल संपर्क के प्रावधान के लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड यानी यूएसओएफ (USOF)  के उपयोग को मंजूरी दे दी जिसकी अनुमानित लागत 6,466 करोड़ रुपये है। आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र और ओडिशा के 44 आकांक्षी जिलों के इन अछूते गांवों को 4जी आधारित मोबाइल सेवाएं मिलेंगी। इस तरह कुल 7,287 गांवों को दूरसंचार टावर और सेवाएं मिलेंगी और लाखों लोगों को कनेक्टिविटी मिलेगी। सरकार ने इसके लिये 18 महीने का समय भी रखा है। इस कदम के साथ ही इलाके में रोजगार की संभावनाए बढ़ेगी जिससे कयास लगाया जा रहा है कि नक्सल विचारधारा पर भी रोक लग सकेगी।

32,152 किमी सुदूर इलाकों में पिछेगा रोड का जाल

इसके साथ साथ कैबिनेट ने 32,152 किमी सुदूर इलाकों को शहरों से जोड़ने के लिये सड़क का निर्माण किया जायेगा। ये सारी सड़कें पीएम ग्रामीण सड़क योजना से पूरी की जायेगी और इसके लिए तय समय निर्धारित करने के लिये विभागों से बोला गया है। सरकार की माने इससे देश में आवागमन और सरल हो सकेगा जिससे देश के छोटे छोटे इलाकों में रोजगार तो बढ़ेगा ही साथ में देश में आत्मनिर्भर बनने का सपना भी सच होगा।

वैसे देखें तो सरकार ने जिन राज्यों के लिये योजना का ऐलान किया है उन राज्यो में ज्यादातर विरोधी पार्टियों की सरकार है लेकिन ये केंद्र सरकार है जो सबका साथ सबका विकास के अपने संकल्प पर काम कर रही ये साफ होता है कि विपक्ष का ये आरोप लगाना कि वो उन्हे साथ लेकर नहीं चल रहे है वो पूरी तरह से गलत है।