बड़े और कड़े फैसले लेने में माहिर है मोदी सरकार

Modi government is expert in taking big and tough decisionsनरेंद्र मोदी देश के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिनका जन्म आजाद भारत में हुआ। प्रधानमंत्री रहते हुए मोदी ने कई बड़े और कड़े फैसले लेते हुए साफ कर दिया कि वे अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटते हैं, भले ही उनके फैसलों पर कितने भी सवाल क्यों न उठें। 2001 में मुख्यमंत्री बनने के बाद 18 साल के राजनीतिक जीवन में (संगठन के अलावा) वे जब तक गुजरात में रहे तो मुख्यमंत्री रहे और जब राष्ट्रीय राजनीति में आए तो सीधे प्रधानमंत्री बने।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कामकाज, कड़े व बड़े निर्णय जनता में गहरी पैठ बना गए। प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक सरकार के स्तर पर बड़े व कड़े निर्णय लिए और वे भविष्य में भी जारी रहेंगे। सरकार के स्तर पर नोटबंदी, जीएसटी, सीर्जकल स्ट्राइक, बालाकोट के जबाब में एयर स्ट्राइक, राफेल सौदा, तीन तलाक रोकने, एनआरसी जैसे कई लिए।

हाल के दिनों में भी मोदी सरकार ने ऐसे कुछ चौकाने वाले बड़े और कड़े फैसले लिए है:

1) चीन के दबाब के बावजूद रीजनल कॉम्प्रेहेन्सिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) समझौता से इनकार

प्रधानमंत्री मोदी ने बैंकॉक में रीजनल कॉम्प्रेहेन्सिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (RCEP) समझौते पर भारत की सहमति देने से स्पष्ट इनकार कर दिया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ‘नेशन फ़र्स्ट’, महज़ एक घोषवाक्य नहीं बल्कि उनकी एनडीए सरकार के निर्णयों का मूलमंत्र भी है। यह बात एक बार फिर तब साबित हो गयी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृढ़निश्चयी स्वभाव से अब तक अच्छे ख़ासे परिचित हो चुके 10 आसियान देशों और भारत समेत उनके सबसे बड़े व्यापार सहयोगी देशों- चीन, जापान, कोरिया, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया समेत 16 देशों के इस समूह—जिसे रीजनल कॉम्प्रेहेन्सिव इकनॉमिक पार्टनरशिप कहा जाता है, के लिए भारत का स्पष्ट नकार शायद एक असंभावित लेकिन ज़रूरी झटका है। इससे भारत के किसानों, डेयरीवालों, छोटे उद्यम, कारख़ाने चलाने वालों, प्रोफेशनलों, सर्विस सेक्टर चलानेवालों, मज़दूरों तथा उपभोक्ताओं के भी हित सुरक्षित हो गए हैं। सबसे बड़ी बात है कि भारत के ये सेक्टर सस्ते चीनी सामान की आशंकित मार से भी बच गए हैं। डेरी उद्योग भी ऑस्ट्रेलिया तथा न्यूज़ीलैंड के डेयरी उत्पादों के हमले से सुरक्षित हो गया है।

2) S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम पर अमेरिका की धमकियाँ बेअसर

मोदी सरकार ने ये साफ़ कर दिया है की देश की प्रगति, सामरिक सुरक्षा, और अंदरूनी शांति जैसे मुद्दों पर सरकार किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी| यही कारण है की अमेरिका जैसी देश की महाशक्ति की धमकियों का भी सरकार पर कोई असर नहीं हुआ। भारत और रूस के बीच हुए मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘एस-400’ का समझौता अमेरिका को कुछ रास नहीं आया। ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि रूस से मिसाइल रक्षा प्रणाली ‘एस-400’ खरीदने के फैसले का अमेरिका और भारत के बीच संबंधों पर गंभीर असर पड़ेगा। दवाब बनाने के लिए अमेरिका ने भारत को मिलने वाली सामान्य तरजीही प्रणाली (GSP) को ख़त्म कर दिया। इन सब के बावजूद मोदी सरकार रूस के साथ हुए अपने करार से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ।

बता दे की रूस द्वारा निर्मित S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुनिया के सबसे आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम में से एक है। अमेरिका की तल्खी के वावजूद भारत ने अपने करार को कायम रखा।

3) पाकिस्तान की धमिकियों के बावजूद कश्मीर से धारा-370 हटाया

सबको चौकाते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने जम्मू और कश्मीर को विशेष स्वायत्तता का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को रद्द करने का फैसला किया। साथ ही साथ जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का निर्णय लिया। 70 साल पुरानी जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली आर्टिकल 370 को ख़त्म करने का साहसिक फैसला लेने की हिम्मत पहले की किसी सरकार ने नहीं दिखाई। यह मोदी का ही सपना था की एक देश, एक विधान; जिसको पूरा करने के लिए जम्मू-कश्मीर राज्य को आर्टिकल 370 से मुक्त कर दिया गया।

4) ईरान के साथ चाबहार बंदरगाह प्रोजेक्ट

पीएम मोदी की कुशल नीति का ही असर है कि अमेरिका भी परोक्ष तौर पर ईरान को लेकर भारत पर ज्यादा दबाव नही बना सका और ये मोदी सरकार की एक बड़ी जीत है। बता दे कि चाबहार पोर्ट का निर्माण भारत ईरान मे कर रहा है। और इसकी देख रेख भारत ही करेगा। इस पोर्ट का प्रबंधन भारत को मिलना पाकिस्तान की ग्वादर पोर्ट पॉलिसी का जवाब माना जा रहा है। चीन ने ग्वादर बंदरगाह को संचालन के लिए चीन को सौंप रखा है। ग्वादर और चाबहार बंदरगाह महज 80 किलोमीटर की दूरी पर हैं। चाबहार पोर्ट का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि भारत पाकिस्तान को बाइपास करते हुए सीधे अफगानिस्तान तक अपना माल पहुंचा सकता है। अफगानिस्तान के जरिये भारत को सेंट्रल एशिया और रूस तक जमीनी पहुंच हासिल हो जाएगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने कड़े फैसलों से बार-बार दुनिया को चौंकाते रहते हैं और उनका यह अंदाज कतई नया नहीं है।