मोदी सरकार लगातार पूर्वी यूपी से पिछड़ेपन का दाग हटाने में लगी हुई है  

आजादी के आधे दशक तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के माथेपर पिछड़ेपन और बीमारू स्थान की जो पहचान थी वो अब धीरे धीरे खत्म हो रही है और वो इसलिये क्योंकि यहां विकास का सूरज अब जगमगाने लगा है। यूपी के पूर्वांचल के गोरखपुर और उसके आसपास के इलाकों के दिन आज बहुर गये हैं क्योंकि यहां इलाज के लिये नया एम्स बन गया है तो 31 साल से बंद बड़ी खाद कारखाना भी चल गया है जिससे अब यहां इलाज और रोजगार दोनो की समस्या कही ना कही खत्म हो जायेगी। 

करीब डेढ़ दशक पुरानी मांग हुई पुरानी

गोरखपुर में एम्स की स्थापना की मांग करीब डेढ़ दशक पुरानी रही। इसे लेकर 2004 से सांसद रहते हुए योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में लंबा जनांदोलन चला था। खुद योगी ने सड़क से लेकर सदन तक पूर्वी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं की मजबूती के लिए हमेशा आवाज बुलंद की। एम्स को लेकर उनकी मुखरता ही थी कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री बने तो उनके जरिये पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की यह बहुप्रतीक्षित मांग पूरी कर ली गई। प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं के बाद 22 जुलाई 2016 को उन्होंने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत इसका शिलान्यास किया था। इस बीच मार्च 2017 में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो इसके निर्माण की सारी बाधाएं एक झटके में दूर हो गईं जिसके बाद अब करीब 7 करोड़ आबादी को इलाज के लिये दूर गांव नही जाना होगा ।

31 साल के बाद फिर बजा गोरखपुर के खाद कारखाने का भोंपू  

31 साल से बंद पड़ा खाद कारखाना आखिरकार शुरू हो गया है। इस कारखाने को लेकर ना जाने कितने वादे किये गये लेकिन हकीकत में वादा निभाया तो पीएम मोदी ने जिन्होने साल 2016 में इस बंद पड़े कारखाने का फिर से शिलान्यास किया था। जिसके बाद इसके चालू होने की उम्मीद जग गई थी जो आज पूरी हो गई है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस कारखाने के चलने के बाद करीब 20 हजार लोगों को रोजगार भी मिलेगा। गोरखपुर का खाद कारखाना 600 एकड़ के इलाके में फैला है। इसे दोबारा शुरू करने में 8903 करोड़ रुपये की लागत आई है। इस कारखाना के शुरू होने से पूर्वांचल में खेती-किसानी के लिए पर्याप्त खाद की उलब्धता हो सकेगी। इस कारखाने में हर दिन 3850 नीम कोटेड यूरिया और 2200 मीट्रिक टन लिक्विड अमोनिया का उत्पादन होगा।

पीएम मोदी ने ये साबित कर दिया की अब ईमानदारी से जनता की सेवा की जाये तो रोड़े कितने भी आते हो लेकिन काम तय समय पर पूरा हो जाता है। ये दोनो योजना इसका बेहतर उदाहरण भी है।