कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर ऐक्शन की तैयारी में मोदी सरकार

ये बात तो सभी जानते हैं कि पीएम विकास कामों को लेकर कोताही करने वालों पर कभी भी नरमी नहीं दिखाते हैं, ऐसा ही उन्होंने अभी भी किया है। हर महीने होने वाली प्रगति बैठक में पीएम उन अधिकारियों पर सख्त नजर आएं जो काम को लेकर लेट-लतीफी करते हैं। उनके खिलाफ सख्त निर्णय लेने के भी पीएम ने आदेश दिये हैं।

एक सप्ताह के अंदर डोजियर तैयार करने का आदेश

पीएम मोदी ने प्रगति बैठक में उस वक्त थोड़े सख्त दिखे जब उन्हें पता चला की लेट-लतीफी के कारण रेलवे की एक परियोजना की लागत तिगुनी हो गई है। इसी तरह, वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर  का फ्लैगशिप प्रॉजेक्ट भी लटक गया। पीएम मोदी परियोजनाओं में लेट-लतीफी के लिए जिम्मेदारी तय करने का निर्देश पहले भी सरकारी विभागों को दे चुके हैं। वो इस बात से नाराज रहते हैं कि प्रॉजेक्ट अटकने से न केवल सुविधा मिलने में देरी होती है बल्कि खर्च भी कई गुना बढ़ जाता है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने बुधवार को हुई प्रगति की मीटिंग में डोजियर तैयार करने की बात दो-दो बार कही। पीएम मोदी ने कहा कि वो एक सप्ताह के अंदर अलग-अलग ‘डोजियर’ तैयार करें और प्रत्येक प्रॉजेक्ट की ताजा स्थिति से वाकिफ कराएं। सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी ने 37वीं प्रगति मीटिंग में राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया कि वो अस्पतालों में ऑक्सिजन प्लांट लगाने के काम में तेजी लाएं ताकि प्रत्येक बेड पर ऑक्सिजन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित हो।

इससे पहले भी कई अधिकारियों पर ले चुके हैं ऐक्शन

पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के पहले दिन से ही सरकारी अधिकारियों को जवाबदेह बनाने पर जोर देना शुरू कर दिया था। वो दफ्तर आने में देरी से लेकर कामकाज निपटाने में लापरवाही भरे रवैये को लेकर नौकरशाहों को सख्त चेतावनी देते रहते हैं। जो अधिकारी चेतावनी के बावजूद अपने वर्किंग स्टाइल में सुधार नहीं ला पा रहे हैं, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति भी दी जा रही है। पिछले साल नवंबर महीने में भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के 21 अधिकारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी थी। देश के अलग-अलग हिस्सों में तैनात इन आयकर अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। ऐसा नहीं है कि भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ मोदी सरकार की यह कोई पहली कार्रवाई थी। पिछले साल की ही बात करें तो जून महीने से वो पांचवीं कार्रवाई थी। सरकार अब तक टैक्स डिपार्टमेंट के 64 अधिकारियों सहित 85 अफसरों को जबरन सेवा से हटा चुकी है। इनमें से 12 अधिकारी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT से थे।

वैसे पीएम पहले हर बैठक में बोलते आये हैं कि सरकार काम को लेकर लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर सकती है तभी तो मोदी सरकार का हर प्रोजेक्ट सही समय पर पूरा होता है। लेकिन वे अधिकारी समझ लें जो कोताही बरतते हैं, सरकार उन्हें कोई भी राहत देने के मूड में नही है।