मोदी सरकार ने चीन सीमा के करीब तक बनवा दिया सड़क मार्ग

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उत्तर भारत को चीन से जोडऩे के लिए बनाई जा रही गर्बाधार- लिपूलेख सड़क मालपा तक पूरी हो गई है। अब मात्र चार किलोमीटर का काम बाकी है। वह भी इस वर्ष पूरा हो जाएगा। इससे सामरिक रूप से चीन सीमा पर मजबूती बढ़ेगी और कैलास मानसरोवर यात्रा भी आसान होगी। श्रद्धालु सीधे वाहन से चीन सीमा तक पहुंच सकेंगे। उन्हें पैदल चलने से निजात मिल जाएगी।

मालपा तक तैयार हो गई है सड़क

गर्बाधार से चीन सीमा लिपूलेख तक 75 किमी सड़क का निर्माण हो रहा है। इसमें सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने बड़ी बाधा पार कर ली है। दुर्गम माने जाने वाले मालपा तक सड़क तैयार कर ली गई है। असल में गर्बाधार से नजंग होते हुए मालपा तक सड़क निर्माण बीआरओ के लिए चुनौती बन गया था। वर्ष 2006 में गर्बाधार से काम शुरू हुआ। मात्र नौ किमी सड़क तैयार करने में 14 वर्ष लग गए। 2006 से 2017 तक पहाड़ काटकर मात्र तीन किमी सड़क बनाई जा सकी। काम में देरी होते देख 2017 में बीआरओ ने यह जिम्मा निजी कंपनी गर्ग एंड गर्ग को सौंप दिया। यह प्रयोग सफल रहा। 2017 से अभी तक बीआरओ के निर्देशन में 6.4 किमी सड़क तैयार हो गई। बीच में चार किमी सड़क और तैयार करनी है। इसके बाद चीन सीमा तक पहुंच आसान हो जाएगी।

सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण

चीन सीमा तक बन रही सड़क सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसे नेपाल सीमा के समानान्तर बनाया गया है। त्रिकोणीय अंतरराष्ट्रीय सीमा की इस सड़क से क्षेत्र में तैनात भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल और एसएसबी को खासी सुविधा मिलेगी। जवानों का सीमा क्षेत्र तक आवागमन आसान होगा और साजो-सामान पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। अभी तक यह काम घोड़े- खच्चरों से लिया जाता है। अंतिम सीमा क्षेत्र तक पहुंचने में धारचूला से चार दिन का समय लगता है, लेकिन सड़क बनने से एक दिन में चीन सीमा तक का सफर पूरा हो जाएगा।

अंतिम भारतीय पड़ाव तक आसान होगी आवाजाही

गर्बाधार- लिपूलेख मार्ग कैलास मानसरोवर यात्रियों के लिए विशेष लाभकारी होगा। बीआरओ का दावा है कि अक्टूबर से नवंबर तक गर्बाधार से अंतिम भारतीय पड़ाव नावीढांग तक सड़क तैयार कर ली जाएगी।

तो मालपा में बाधित नहीं होगी यात्रा

कैलास मानसरोवर यात्रा मालपा क्षेत्र में सर्वाधिक बाधित होती रही है। कठोर चट्टान वाले इस इलाके में अक्सर भूस्खलन होते रहते हैं। तीन वर्ष पूर्व यहां आई भीषण आपदा के कारण यात्रा को बीच में ही रोकना पड़ गया। बीते वर्ष भी भूस्खलन के कारण यात्रा करीब 15 दिनों तक बाधित रही। अब मालपा तक सड़क तैयार होने से यात्रा में आसानी होगी।

2006 में शुरू हुआ था निर्माण

सामरिक महत्व को देखते हुए वर्ष 2006 में गर्बाधार से लिपूलेख तक सड़क निर्माण शुरू हुआ। वर्ष 2012 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन विषम भौगोलिक परिस्थिति के चलते इसमें तमाम बाधाएं आती रहीं। मालपा में कठोर चट्टानों की कटाई में आस्ट्रेलिया से आधुनिक मशीनें मंगाई गईं। उन्हें हेलीकॉप्टर से क्षेत्र में उतारा गया। अब दुरूह क्षेत्र में काटने का काम पूरा हो गया है।

बीआरओ कमांडर सैन्य अधिकारियों के साथ मालपा पहुंचे

मालपा तक सड़क तैयार होने के बाद बीआरओ के कमांडर सोमेंद्र बनर्जी सैन्य अधिकारियों के साथ मंगलवार को मालपा पहुंचे। उन्होंने सड़क का निरीक्षण किया। इस मौके पर सड़क निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए।

Originally published at DJ


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