डिजिटल इकोनॉमी को पंख लगाती मोदी सरकार

कोरोना  के चलते आई आर्थिक सुस्ती के बीच भारत में डिजिटलीकरण के लिए तेजी से विदेशी निवेश  भारत के लिए शुभ संकेत हैं। जो खुद में एक सुकूनदेह बात भी है। चीनी डिजिटल कंपनियों की जगह अमेरिकी डिजिटल कंपनियों का भारत में बढ़ता प्रौद्योगिकी निवेश और बढ़ती साझेदारी डिजिटल भारत, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया अभियान के लिए काफी  फायदेमंद होगा।

 

डिजिटल निवेश से भारत के बहुरेंगे दिन

जब विश्व में आर्थिक हालात किसी भी देश के ठीक नही है तब भारत जैसे देश में बाहरी निवेश ये बता रहा है कि भारत में कुछ तो बात है जो दुनिया इस तरफ खिची आ रही है। एक तो भारत विश्व का बहुत बड़ा कारोबारी जगह है तो अब मोदी सरकार के नये नियमो के चलते विश्व बाजार के लिये भारत का आंगन खोल भी दिया है। जिससे हाल ही में दुनिया की दिग्गज टेक्नॉलजी कंपनी गूगल भारत में अगले 5 से 7 साल में 10 अरब डॉलर  का निवेश करेगा। गौरतलब है कि गूगल द्वारा जियो में 33,737 करोड़ रुपये के निवेश से 7.7 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा पहले ही हो चुकी है। इस तरह गूगल भी भारत में बड़े निवेश के लिए फेसबुक, क्वालकॉम तथा विभिन्न वेंचर कैपिटल कंपनियों से कदम मिलाती दिखाई दे रही है। भारत के टेक्नॉलजी क्षेत्र की ओर वैश्विक कंपनियों के द्वारा रिकॉर्ड निवेश प्रवाहित होने में ऑनलाइन एजुकेशन तथा वर्क फ्रॉम होम की प्रवृत्ति बढ़ने से देश में डिजिटल दौर तेजी से आगे बढ़ा है। इस क्रम में इंटरनेट के उपयोगकर्ता छलांगें मारते हुए आगे बढ़ रहे हैं। देश भर में डिजिटल इंडिया के तहत सरकारी सेवाओं के डिजिटल होने, 32 करोड़ से अधिक जनधन खातों में लाभार्थियों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से भुगतान, तेजी से बढ़ी ऑनलाइन खरीदारी, लोगों की क्रय शक्ति के अनुसार मोबाइल फोन व अन्य डिजिटल चीजों की सरल आपूर्ति के कारण भी देश में डिजिटलीकरण आगे बढ़ा है।

नई-कॉमर्स नीति

कोविड-19 के बाद बनने वाली वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में डेटा की वही अहमियत होगी जो आज कच्चे तेल की है। इसलिए डेटा को एक अहम आर्थिक संसाधन के रूप में मान्यता देनी होगी और नई ई-कॉमर्स नीति के मसौदे में डेटा के स्थानीय स्तर पर भंडारण के विभिन्न पहलू शामिल करने होंगे। ग्लोबल डिजिटल कंपनियां अब भारत के टेक्नॉलजी क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ाती दिख रही हैं, इसलिए ध्यान देना होगा कि भारतीय सर्वर पर भंडारित डेटा का दुरुपयोग न हो। नई ई-कॉमर्स नीति के तहत डेटा सिक्योरिटी को मजबूत बनाने और देश के डेटा पर फेसबुक, गूगल जैसी कंपनियों का नियंत्रण खत्म करने का प्रावधान सुनिश्चित करना जरूरी है। उम्मीद करें कि डिजिटलीकरण के साथ-साथ देश की डिजिटल इकॉनमी भी आगे बढ़ेगी। इसपर टैक्स से सरकार की आमदनी बढ़ेगी, रोजगार के मौके बढ़ेंगे, आर्थिक क्रियाकलापों में पारदर्शिता आएगी और भारत के विकास की रफ्तार बढ़ेगी। यानी की मोदी सरकार ने वक्त रहते ये समझ लिया है कि आने वाले दिनो में इस सेक्टर में समूची दुनिया में व्यपार के नये आयाम छूए जा सकते है। शायद इसलिये आज भारत इन तरफ तेजी के साथ पहल कर रहा है और विदेशी कंपनियोन का भारत में आना इसके लिये एक बड़ी अच्छी पहल भी है और शुभ संकेत भी है।