भ्रष्टाचार पर प्रहार, मोदी सरकार ने 21 भ्रष्ट कर अधिकारियों को किया जबरन रिटायर

Modi government forced 21 corrupt tax officers to retireभ्रष्टाचार को लेकर सरकारी अफसरों के खिलाफ केंद्र सरकार की कार्रवाई जारी है। सरकार ने भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में संलिप्त अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के अभियान के पांचवें चरण में 21 और कर अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दे दी है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सेवा नियमावली के नियम 56 (जे) के तहत बी समूह के 21 कर अधिकारियों को भ्रष्टाचार और दूसरे आरोपों में अनिवार्य सेवानिवृत्ति पर भेज दिया है। इस तरह अब तक इस साल 85 अधिकारियों को जबरन रिटायर किया गया है। इसमें से 64 टैक्स अधिकारी हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि वह कर प्रशासन को साफ और भ्रष्टाचार मुक्त करेंगे ताकि ईमानदार कर दाताओं को परेशान ना किया जाए। केंद्र सरकार ने अगस्त, 2019 में भी कथित तौर पर भ्रष्टाचार और कदाचार के आरोपों के बाद 22 वरिष्ठ कर अधिकारियों को नियम 56 (जे). के अंतर्गत बर्खास्त कर दिया गया था।

इन सभी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के अलावा अन्य संगीन आरोप हैं और ये सभी सीबीआई की जांच के घेरे में हैं। दरअसल, मौलिक नियम 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। सरकार के पास यह अधिकार है कि वह ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दे सकती है। ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद नॉन-परफॉर्मिंग सरकारी सेवक को रिटायर करना होता है। ऐसे में सरकार यह फैसला लेती है कि कौन से अधिकारी काम के नहीं हैं।

सूत्रों के अनुसार इस बार जिन अधिकारियों को निकाला गया है उनमें सीबीडीटी के मुंबई कार्यालय के तीन और ठाणे के दो अधिकारी शामिल हैं। अन्य अधिकारी विशाखापत्तनम, हैदराबाद, राजमुंदरी, बिहार के हजारीबाग, महाराष्ट्र में नागपुर, गुजरात के राजकोट, राजस्थान के जोधपुर, माधोपुर तथा बीकानेर और मध्य प्रदेश के इंदौर एवं भोपाल में तैनात थे।

दिलचस्प तथ्य तो यह है कि जिन अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दी गई है, उनमें आधे से ज्यादा अधिकारियों को सीबीआई ने कथित तौर पर रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। इनमें से एक अधिकारी को 50,000 रुपये की घूस लेते पकड़ा गया था। सूत्रों ने कहा कि एक अधिकारी के बैंक लॉकर में कथित तौर पर 20 लाख रुपये से ज्यादा की नकदी मिली थी, जबकि ठाणे में तैनात एक अधिकारी ने अपने और पत्नी के नाम पर 40 लाख रुपये की चल और अचल संपत्ति अर्जित की थी।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने भ्रष्टाचार और कार्य में ढिलाई को लेकर बेहद सख्त कदम उठाया था। सरकार ने सात पीपीएस अफसरों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। शासन ने सात पुलिस उपाधीक्षकों को अनिवार्य सेवानिवृत्त दी थी।