ड्रैगन को चौतरफा घेरने में लगी मोदी सरकार

यूं तो चीन लगातार सीमाओं से पीछे हट रहा है, लेकिन भारत इस बार चीन को लेकर अपना कड़ा रूख रखे हुए है, तभी चीनी सीमा पर तो भारत सड़क निर्माण कर ही रहा है। अब भूटान के यती इलाके में भी सड़क निर्माण करेगा जिस इलाके को चीन अपना इलाका बताया करता है। यानी भारत अब चीन के सीने में सीधे वार करने का मन बना चुका है।

भूटान के यती इलाके में भारत की सड़क बनाने की तैयारी 

भूटान के जिस इलाके यती पर ड्रैगन की बुरी नजर लगी रहती है, अब उस इलाके में भारत एक सड़क निर्माण करने जा रहा है जिससे गुवाहाटी और अरुणाचल प्रदेश के तवांग की दूरी 150 किलोमीटर घट जाएगी। भूटान के यती क्षेत्र को चीन ने हाल ही में अपना अधिकार जताया था। यह सड़क बन जाने से भारत को रणनीतिक तौर पर फायदा होगा। क्योंकि यह चीन की सीमा से लगती हुई निकलेगी। यह सड़क बन जाने के बाद भारत चीन से कई गुना ज्यादा तेजी से अपनी सीमाई इलाकों में फौज तैनात कर सकती है। सिर्फ तवांग ही नहीं, बल्कि पूरे भूटान के पूरे पूर्वी इलाके और उत्तर पूर्वी राज्यों की चीन से सटी सीमाओं पर सेना जल्दी पहुंच सकती है। सरकार ने BRO को सड़क बनाने का काम सौंप दिया है। यह सड़क तवांग के पास स्थित लुमला को भूटान के त्राशीगांग से जोड़ेगा, यहां से थिंपू नजदीक हो जाएगा, साथ ही भारतीय सीमा भी इससे भारत और भूटान की सुरक्षा बढ़ जाएगी साथ ही कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। 1984 से 2016 तक भूटान और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कुल 24 बैठकें हो चुकी हैं। डोकलाम विवाद के बाद से भूटान और चीन के बीच बातचीत बंद है। ऐसे में भारत के इस कदम से चीन को एक और घात पहुंचा होगा।

ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे ड्रैगनसे लंबी टनल बनाने की तैयारी

भारत-चीन तनाव के बीच केंद्र सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 14 किलोमीटर टनल बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि देश की पहली नदी के नीचे बनने वाली सड़क परिवहन टनल पूर्वी चीन के ताइहू झील के नीचे बन रही सड़क परिवहन टनल से अधिक लंबी है। अत्याधुनिक तकनीक से बनने वाली टनल असम-अरुणाचल प्रदेश से सालभर कनेक्टिविटी मुहैया कराने के चलते सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। आने और जाने के लिए पृथक दो ट्यूब वाली इस टनल में सैन्य वाहन, रसद-हथियार पहुंचाने वाले वाहन 80 किलोमीटर की रफ्तार पर फर्राटा भर सकेंगे। सरकार असम के गोहपुर (एनएच-54) से नुमालीगढ़ (एनएच-37) को जोड़ने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे चार लेन सड़क परिवहन टनल बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचएआईडीसीएल) ने अमेरिका की पेशवर कंपनी लुइस बर्जर कंपनी द्वारा तैयार प्री-फिजिबिलटी रिपोर्ट व डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को 18 मार्च को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।

 

मतलब साफ है कि चीन अगर डाल डाल है तो भारत इस बार पात पात की सियासत करके चीन को मान देने में लगा है। भारत का साफ कहना है कि आत्मनिर्भर बनने से ही धूर्त चीन की अक्ल ठिकाने आयेगी।