छोटे कारोबारियों को आत्मनिर्भर बनाने में जुटी मोदी सरकार

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कोरोना काल में खड़े आर्थिक संकट को दूर करने के लिये सरकार ने छोटे और लघु कारोबारियों के लिये  महापैकेज के ऐलान के वक्त 3 लाख करोड़ रूपये का लोन देने की बात कही थी कैबिनेट से ये पास होने के बाद आज तक इस दिशा में 13500 करोड़ रूपये का लोन छोटे लघु कारोबारियो को दे दिया गया है जो ये बताता है कि कितनी तेजी के साथ भारत के लोग भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिये जुट चुके हैं।

महज 10 दिन में 13500 करोड़ का दिया गया लोन

कोरोना को मात देने के लिए जहां कोरोना वारियर्स मोर्चा संभाले हुए हैं तो दूसरी तरफ आर्थिक मोर्चे पर देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिये छोटे कारोबारियों ने बीड़ा उठा लिया है। इस कड़ी में सरकार उनके लिए सबसे बड़े कंधे के तौर पर काम कर रही है। तभी लॉकडाउन में झूझ रहे नगदी की कमी को पूरा करने के लिए सरकार ने महापैकेज के ऐलान में इन कारोबारियों के लिए 3 लाख करोड रूपये का लोन का प्रवधान रखा था। जिसके तहत महज 10 दिन के भीतर ही 13500 करोड़ रूपये का लोन छोटे कारोबारियों ने ले लिया है जो ये बता रहा है कि देश का आर्थिक पहिया तेजी से आगे की ओर भागे इसके लिये देश के कारोबारी भी तेजी से लग चुके हैं।

GECL योजना का मकसद

गारंटीशुदा आपात कर्ज यानी GECL योजना का मकसद छोटे उद्योग को संकट की इस घड़ी में आसानी से कर्ज सुलभ कराने में मदद करना है। इससे कारोबार के लिए सस्‍ती ब्‍याज दर पर लोन मिलेगा। वहीं एमएसएमई परिचालन देनदारी को पूरा कर, अपना कारोबार शुरू कर सकेंगे।  योजना के तहत दिये जाने वाले कर्ज पर बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिये ब्याज 9.25 प्रतिशत नियत किया गया है, जबकि एनबीएफसी के मामले में यह 14 प्रतिशत है। GECL के तहत दिये गये कर्ज की मियाद चार साल होगी और पहले भुगतान करने पर कोई जुर्माना नहीं लगेगा। इसके साथ ही GECL से प्राप्त कर्ज की मूल राशि लौटाने के लिये एक साल की मोहलत दी गई है, हालांकि, जो ब्याज बनेगा, वह छूट अवधि के दौरान भी देना होगा। सबसे बड़ी बात ये है कि इस योजना में वो कारोबारी भी शामिल किये गये हैं जिनका सलाना कारोबार 25 करोड़ से ज्यादा का होता था। ऐसे में जिस तरह से कंपनियों ने लोन लिया है उससे तो यही लगता है कि देश में रोजगार तेजी के साथ बढ़ेगा क्योंकि कारोबार का पहिया फुल स्पीड में भागेगा।

कुल मिलाकर ये कहा जाये तो गलत नही होगा कि आत्मनिर्भर भारत को बनाने के लिये अब हमारे कारोबारियों ने भी कमर कस ली है। अब जब देश का हर वर्ग देश को नये आयाम छूने के लिए निकल चुका है। ऐसे में मोदी सरकार ने जो एक अलख देश के 135 करोड़ लोगों में लगाई है कुछ कर दिखाने की वो अगर साकार हो गई तो सच में हमारा देश आत्मनिर्भर देश की नई परिभाषा लिखेगा।


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