मोदी सरकार ने भारत-चीन बॉर्डर पर बनवाई सड़क, महज 40 मिनट में डोकलाम पहुंच जाएगी भारतीय सेना

Indian army will reach Doklam in just 40 minutes

भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम डोकला बेस जो सिक्किम के निकट विवादित डोकलाम (Doklam) पठार के किनारे पर मौजूद है, तारकोल से बनी हर मौसम में काम करने वाली सड़क तैयार की है, जिस पर कितना भी वज़न ले जाने पर कोई भी पाबंदी नहीं है। इस नई सड़क ने भारतीय सेना की डोकलाम तक पहुंच को सात घंटे की पूर्व अवधि से केवल 40 मिनट तक ला दिया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने भीम बेस को भारतीय सेना के फॉरवर्ड डोका ला बेस से जोड़ने वाली सड़क का निर्माण किया है जो डोकलाम त्रिकोणीय जंक्शन का शुरुआती बिंदु है। बीआरओ द्वारा युद्ध-स्तर पर बनाई गई रणनीतिक सड़क उस क्षेत्र में रणनीतिक समीकरण को बदल देगी, जिसने हाल के दिनों में भारतीय और चीनी सेनाओ के बीच गतिरोध देखा है।

समाचारों के अनुसार, नवनिर्मित सड़क डोकलाम पठार पर सैनिकों की तैनाती को सुनिश्चित करेगी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण त्रिकोणीय जंक्शन में रसद की आसान आवाजाही की सुविधा प्रदान करेगी। इससे पहले, भारतीय सेना को खच्चरों पर सात घंटे की यात्रा पर भारत-भूटान और चीन के बीच त्रिकोणीय जंक्शन पर जाना था।

बता दें कि जून 2017 में डोकला घाटी में ही भारत (India) और चीन (China) की सेनाएं आमने-सामने आ गई थीं। इसके बाद 73 दिन तक दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल बन रहा. आपसी बातचीत के बाद 28 अगस्त 2017 को संकट टला और सेनाएं पीछे हटी थीं। अप्रैल 2018 में वुहान में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आयोजित अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में, दो पक्षों ने भारतीय सेना और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच सैन्य गतिरोध को कम करने के लिए कई कदमों की घोषणा की।

हाल ही में रक्षा मंत्रालय (MoD) के दस्तावेज़ ने कहा था कि भारतीय सेना ‘डोकलाम में’ चीनी गतिविधियों की निगरानी कर रही है। जुलाई में प्रकाशित एमओडी रिपोर्ट में कहा गया था कि डोकलाम पठार के किनारे की स्थिति ‘शांतिपूर्ण’ थी। “पिछले साल की तुलना में, इस वर्ष के सीमा उल्लंघन की संख्या में काफी कमी आई है। नतीजतन, इन उल्लंघन के दौरान फेसऑफ़ / आक्रामक बातचीत का प्रतिशत भी इस वर्ष कम हो गया है। वुहान शिखर सम्मेलन के बाद, फ्लैग मीटिंग की संख्या में वृद्धि हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि विभिन्न स्तरों पर चर्चा के माध्यम से बकाया मुद्दों को हल करने के इरादे से इसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

यही नहीं, डोकला तक जाने के लिए हर मौसम में काम करने वाली दूसरी सड़क – फ्लैग हिल-डोकला एक्सिस – भी 2020 तक पूरी हो जाएगी। बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइज़ेशन (BRO) के मुताबिक, फ्लैग हिल-मधुबाला-डोकला रूट पर बनी यह सड़क 11,811 फुट से 13,779 फुट की ऊंचाई वाले बेहद ऊंचे इलाके से गुज़रती है।’ यह रूट रणनीतिक रूप से अहम कई पोस्टों को जोड़ता है इस सड़क का 10 किलोमीटर हिस्सा पहले ही तैयार हो चुका है। 20 किलोमीटर से कुछ ज़्यादा का बचा हुआ हिस्सा एक साल के भीतर तैयार हो जाएगा।

गौरतलब है की भारत डोकलाम पठार को अविवादित रूप से भूटानी क्षेत्र मानता है, जबकि चीन इसे अपनी चुम्बी घाटी का ही हिस्सा मानता है। चुम्बी घाटी खंजर की शक्ल में बना ज़मीन का वह टुकड़ा है, जो पश्चिम में सिक्किम तथा पूर्व में भूटान के बीच स्थित है। विवादित डोकलाम क्षेत्र लगभग 89 वर्ग किलोमीटर का टुकड़ा है, जिसकी चौड़ाई 10 किलोमीटर भी नहीं है।