ऊर्जा के क्षेत्र में नई क्रांति लाती मोदी सरकार

लगातार बढ़ता प्रदूषण कई समस्याओं की वजह बन रहा है। इससे कार्बन उत्सर्जन में बेतहाशा इजाफा हो रही है। परिणामस्वरूप वैश्विक तापमान में निरंतर बढ़ोतरी हो रही है। हिमालय से लेकर अंटार्कटिका तक बर्फ की पिघलती चादर ने मानव जीवन के समक्ष गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। लेकिन बदलते जलवायु को ध्यान में रखकर पीएम मोदी बहुत पहले ही योजना बना रहे है जिसके चलते उन्होने प्लास्टिक पर रोक लगाने की मुहीम छेड़ी तो दूसरी तरफ सोलर ऊर्जा और हाइड्रोजन ऊर्जा को भविष्य के ईंधन के रूप में विकसित करने में जुटे है। 

हाइड्रोजन ऊर्जा को लेकर बढ़ता भारत  

वर्तमान परिस्थितियों में हाइड्रोजन ऊर्जा की उपयोगिता को देखते हुए विश्व के कई विकसित और विकासशील देशों ने इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए हैं। दुनिया की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनियां भी अब हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली कारें बना रही हैं। वे इस दिशा में व्यापक निवेश कर रही हैं। दरअसल हाइड्रोजन फ्यूल सेल हवा और पानी में किसी तरह के प्रदूषक तत्व नहीं छोड़ते हैं। इसमें उत्प्रेरक शक्ति के लिए हाइड्रोजन का उपयोग होता है। एक बार टैंक फुल होने पर हाइड्रोजन कारें 400 से 600 किलोमीटर तक चल सकती हैं। यही नहीं इन वाहनों को पांच से सात मिनट में रीफ्यूल भी किया जा सकता है। हाइड्रोजन ऊर्जा हमारे लिए राजस्व की बचत का भी माध्यम बन सकती है। ऊर्जा के इस अक्षय स्नोत स्रोत का जितना अधिक उपयोग बढ़ेगा, उसी अनुपात में तेल आयात को कम करने में मदद मिलेगी।

सोलर ऊर्जा को लेकर तेजी हो रहा काम

इसी तरह मोदी सरकार लगातार सौर ऊर्जा  के इस्तेमाल पर लगातार बल दे रही है तो प्रदूषण को कम करने के लिये सौर ऊर्जा को लेकर देश में रणनीति बनाने में लगी है। आज मोदी राज में ही देश सौर ऊर्जा के मामले में तीसरा सबसे बड़ा देश है। मोदी सरकार की पहल के चलते ही गांव में ट्वूब बेल हो चलाना हो दूसरे काम आज सौर ऊर्जा के जरिये हो रहे है। इतना ही नही मेट्रो स्टेशन हो या फिर दूसरी सरकारी इमारते सब जगह सौर ऊर्जा का इस्तेमाल साफ तौर पर देखा जा सकता है जो ये बता रहा है कि भारत प्रदूषण को कम करने के लिए कितना सजग है खासकर तब से जब से मोदी सरकार ने देश की सत्ता अपने हाथ में संभाली है।

मतलब नये भारत में सिर्फ नियम कानून से ही जीवन में बदलाव नही लाया जा रहा है बल्कि देश को तेजी से विकास के पथ पर दौड़ाया जा सके इसके लिये लगातार ऊर्जा के सेक्टर में भी लंबी छलांग लगाई जा रही है। जिसके चलते बिचली पर लोगो की निर्भयता कम की जा रही है। और इसका असर भी दिख रहा है। तभी किसान, कारोबारी नये प्रबंधन से आत्मनिर्भर बनते हुए दिक रहे है।