मिसाइल मैन जिन्हें कभी नही भूल सकता हिंदुस्तान

भारत के इतिहास में पहली बार कोई राष्ट्रपति वैज्ञानिक रहा हैं। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को लोग मिसाइल मैन के नाम से जानते हैं। डॉक्टर अबुल पकिर जैनुल्लाब्दीन अब्दुल कलाम न सिर्फ एक महान वैज्ञानिक, प्रेरणादायक नेता थे बल्कि अद्भुत इंसान भी थे। उन्होंने जिसके साथ भी काम किया उनके दिल को जीत लिया। तमिलनाडु के शहर रामेश्वरम के साधारण से परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक लड़के ने मिसाइल मैन तक का सफर पूरा किया। आज लाखों-करोड़ों लोग उन्हें अपना प्रेरणा स्त्रोत मानते हैं और उनकी बातों का अनुसरण करते हैं। चलिए जानते है उनके जीवन से जुड़े कुछ रोचक किस्से बताते है जिन्हें जानकर आप हैरान हो जाएंगे।

परिवार की पाई-पाई चुकाई

राष्ट्रपति कलाम सादगी और ईमानदारी की मिसाल थे जो आज के राजनीतिक हालात में दुर्लभ हो चला है। एक बार कलाम का पूरा परिवार उनसे मिलने दिल्ली आया। वे कुल 52 लोग थे, जिनमें उनके 90 साल के बड़े भाई से लेकर उनकी डेढ़ साल की परपोती भी शामिल थी। स्टेशन से सभी को राष्ट्रपति भवन लाया गया, जहां वह 8 दिन तक भवन में रुके। उनके आने-जाने से लेकर खाने-पीने तक, यहां तक की एक प्याली चाय का खर्चा भी कलाम ने अपनी जेब से दिया। इतना ही नहीं कलाम ने अपने अधिकारियों को भी साफ तौर पर निर्देश दिया था कि इन मेहमानों के लिए राष्ट्रपति भवन की कारें इस्तेमाल नहीं की जाएंगी। रिश्तेदारों के खाने-पीने के सारे खर्च का ब्यौरा अलग से रखा गया और जब वह सभी वापस गए तब कलाम ने अपने निजी खाते से 3,52,000 रुपये का चेक काट कर राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा।

राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान लिया 2 दिन का अवकाश

जहां नेता छुट्टियों पर घूमने जाने के लिए बेकरार रहते हैं वहीं, क्या आप जानते है कि अब्दुल कलाम ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में सिर्फ दो छुट्टियां ली थीं। एक बार जब उनके पिता की मौत हुई थी और दूसरी जब उनकी मां की मौत हुई थी। बाकी के वक्त वो सिर्फ देश सेवा में लगे रहे। इतना ही नही कलाम ने कभी किसी का उपहार नहीं रखा। एक बार किसी ने उन्हें 2 पेन तोहफे में दिए थे जिन्हें उन्होंने राष्ट्रपति पद से विदा लेते वक्त खुशी से लौटा दिए थे। उनका कहना था कि ‘उनके पिता ने सिखाया है कि कोई उपहार कबूल मत करो।’

दो सूटकेस लेकर पहुंचे राष्ट्रपति भवन

जब डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को राष्ट्रपति चुना गया था तो उनके स्वागत के लिए जोरो-शोरो से तैयारियां की गईं, राष्ट्रपति भवन को खूबसूरती से सजाया गया। वहीं ये तमाम तैयारी इसलिए की गई थीं कि देश के नए राष्ट्रपति का सामान ठीक से भवन में रखा जा सके। लेकिन इस बात को काफी कम लोग जानते हैं कि जब अब्दुल कलाम वहां पहुंचे तो वो सिर्फ 2 सूटकेस लेकर पहुंचे थे। एक सूटकेस में उनके कपड़े तथा दूसरी में उनकी प्रिय किताबें थी।

मुशर्रफ को दिया था 30 मिनट लेक्चर

जब साल 2005 में जनरल परवेज मुशर्रफ भारत आए, तब वो तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ-साथ राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से भी मिले। मुलाकात से एक दिन पहले जब कलाम के सचिव पीके नायर उनके पास गए और उन्होंने बताया कि “मुशर्रफ जरूर कश्मीर का मुद्दा उठाएंगे। आपको इसके लिए तैयार रहना चाहिए।” इसपर कलाम एक क्षण के लिए ठिठके, और कहा, ”उसकी चिंता मत करो। मैं सब संभाल लूंगा।” अगले दिन ठीक 30 मिनट तक चली अब्दुल कलाम और मुशर्रफ की मुलाकात में मुशर्रफ ने सिर्फ कलाम की सुनी। कलाम उनको ‘संक्षेप’ में ‘पूरा’ प्रवाइडिंग अर्बन फैसिलिटीज टु रूरल एरियाज कॉन्सेप्ट का मतलब समझाते रहे और बताते रहे कि आने वाले 20 सालों में दोनों देश इसे कैसे हासिल कर सकते हैं। वहीं मुलाकात के 30 मिनट पूरे होने के बाद मुशर्रफ ने कहा, “धन्यवाद राष्ट्रपति महोदय, भारत काफी भाग्यशाली है कि उसके पास आप जैसा एक वैज्ञानिक राष्ट्रपति है।

यूं तो कलाम साहब के साथ जुड़े और भी काफी किस्से है लेकिन ये किस्से ऐसे है जो ये बताते है कि कलाम साहब का व्यतित्व उन्हे दूसरो से कैसे अलग बनाता है। शायद मां भारती का ये लाल आज भी जहां होगा सिर्फ भारत के विकास के बारे में ही सोच रहा होगा और इस बात पर कोई शक नही कर सकता है।

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