दुष्कर्मियों को दया याचिका का कोई अधिकार नहीं: राष्ट्रपति

हैदराबाद की पशु चिकित्सक के आरोपियों का एनकाउंटर

हैदराबाद की पशु चिकित्सक के आरोपियों के एनकाउंटर को लेकर पूरे देश में बहस शुरू हो गई है। कोई इसके पक्ष में है, तो कोई विपक्ष में। इन सब के बीच मगर एक बात तय है कि देश में बेटियों को इंसाफ पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। दुष्कर्मियों को फांसी चढ़ाने का कानून तो है, लेकिन दोषियों को फांसी पर लटकाने की राह इतनी भी आसान नहीं है। इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दुष्कर्म के मामले में देश में आखिरी फांसी करीब 15 साल पहले हुई थी।

हैदराबाद के आरोपियों के एनकाउंटर के बाद अब सबकी नजरें एक बार फिर से निर्भया मामले पर हैं। 16 दिसंबर को इस घटनाक्रम के सात साल पूरे हो जाएंगे। इस मामले के एक दोषी विनय शर्मा की दया याचिका की फाइल गृह मंत्रालय ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेज दी है। राष्ट्रपति की तरफ से की गयी एक टिप्पणी के बाद जल्द ही इस मामले के भी किसी नतीजे पर पहुंचने की संभावनाएं नजर आने लगी हैं।

दुष्कर्मियों को माफी के खिलाफ हैं राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

इस बीच देश भर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर चिंता जताते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि पोस्को कानून के तहत रेप के दोषी करार दिए गए आरोपियों को दया याचिका फाइल करने का कोई अधिकार नहीं है। संसद को दया याचिका का आकलन करने की जरूरत है। राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे में आया है जब पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ दुष्कर्म व जघन्य अपराधों को लेकर बेहद नाराजगी है। राष्ट्रपति कोविंद ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल अफेंसेज (पॉक्सो) एक्ट के तहत दुष्कर्म के दोषियों को दया याचिका की अनुमति नहीं होनी चाहिए।’ उन्होंने कहा, ‘मुझे विश्वास है कि आप मेरी भावनाओं को समझते हैं, लेकिन इस संविधान संशोधन पर अंतिम निर्णय संसद को लेना है।’ संसद ने इस साल अगस्त में पॉक्सो एक्ट में संशोधन किया है और जघन्य दुष्कर्म के मामले में मौत की सजा को शामिल किया है।

आपको बता दें कि अगर निर्भया के दोषियों की दया याचिका को खारिज किया जाता है तो साल 2004 के बाद ऐसा पहला मौका देश में होगा जब रेप के दोषियों को फांसी की सजा हो सकेगी। दुष्कर्म के मामले में आखिरी फांसी वर्ष 2004 में कोलकाता में हुई थी।

Death Sentence

गृह मंत्रालय की तरफ से राष्ट्रपति को साल 2012 के गैंगरेप दोषी विनय शर्मा की दया याचिका फाइल भेजी गई है। मंत्रालय की तरफ से इस दया याचिका को खारिज करने का प्रस्ताव दिया गया है। दिल्ली सरकार की ओर से और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी राष्ट्रापति से दया याचिका को खारिज करने की अपील कर चुके हैं। हैदराबाद के आरोपियों के एनकाउंटर के बाद निर्भया की मां कहती हैं कि पिछले सात सालों से वह 2012 में ही खड़ी हैं और अभी तक उनकी बेटी के साथ राक्षसों सा सुलूक करने वाले दरिंदे जिंदा हैं। निर्भया गैंगरेप में शामिल आरोपियों को पकड़ने में पुलिस को छह दिन का समय लगा था। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुनाने में नौ माह का समय लग गया था। और चारों आरोपियों को दोषी मानकर कोर्ट ने उन्हें मौत की सजा सुनाई थी। लेकिन कानूनी दाव-पेंच के कारण आज भी उन दोषियों की मौत की सजा पूरी नहीं हो पायी है।

गौरतलब है की पिछले 15 साल में देश में सिर्फ चार लोगो को फांसी मिली है।

इन चार लोगों को मिली फांसी

• धनंजय चटर्जी, 2004 : नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या, कोलकाता में फांसी दी गई
• मोहम्मद अजमल कसाब, 2012 : मुंबई हमले में शामिल आतंकी को पुणे के येरवदा जेल में फांसी दी गई
• मोहम्मद अफजल गुरु, 2013 : संसद हमले के दोषी को तिहाड़ जेल में फांसी दी गई
• याकूब मेमन, 2015 : 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट में नागपुर जेल में फांसी पर लटकाया गया