नमामि गंगे का चमत्कार, पटना में गंगा घाटों की हुई कायापलट

गंगा भारत की सबसे महत्वपूर्ण एवं सबसे लंबी नदी है। गंगा नदी का न सिर्फ सांस्कृतिक महत्व है, बल्कि आध्यात्मिक महत्व भी है। इसी महत्ता के कारण ही सरकार गंगा को निर्मल करने के लिए ‘ नमामि गंगे’ परियोजना लांच किया था।

गंगा नदी को निर्मल करना सरकार और आम नागरिक दोनों का दायित्व है। वरना, गंगा जीवनदायीनी न रहकर कोई और रूप धारण कर लेगी, जो भारतीय संस्कृति और मानव हित दोनों में नहीं होगी। इसके लिए जिम्मेदार सिर्फ हम होंगे। इसलिए सबको मिलकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के परिचायक व जीवन देने वाली गंगा नदी को अविरल और निर्मल करना ही होगा।

नमामी गंगे प्रोजेक्ट के तहत पटना में गंगा की साफ सफाई के साथ साथ घाटों को सुंदर बनाने के काम भी हो रहा है। रिवर फ्रंट डेवलपमेंट के जरिए पटना के अधिकतर गंगा घाट एक दूसरे के साथ जुड़ गए हैं। पटना में गंगा नदी के किनारे बीस घाट हैं, जिनमें से 16 घाट एक दूसरे से कनेक्ट हो चुके हैं। पटना के कलेक्ट्रेट घाट से लेकर नौजर घाट की साफ-सफाई के साथ ही सौंदर्यीकरण का काम पूरा हो चुका है।

घाटों का यह पूरा गलियारा करीब छह किलोमीटर का है और इस पूरे रास्ते में कहीं भी गंदगी का नामो-निशान नजर नहीं आता। गंगा घाट की दीवारों पर खूबसूरत पेंटिंग्स बनाई गई हैं और लोगों की सुविधा के लिए काफी इंतजाम किए गए हैं। अब पटना में रहनेवाले लोग यहां सुबह मॉर्निंग वॉक करने यहां आ सकते हैं और शाम को गंगा किनारे टहलने के साथ-साथ दोस्तों के साथ वक्त बिता सकते हैं।

गंगा किनारे रोज शाम आरती

रात के वक्त इन घाटों की खूबसूरती देखते ही बनती है। रात को पूरा इलाका रंग बिरंगी रोशनी में डूब जाता है। यहां रोशनी का जबरदस्त इंतजाम है इसीलिए जब लोग घूमने आते हैं तो हर घाट की अपनी अलग पहचान और अलग सुंदरता नजर आती है। यहां गंगा किनारे रोज शाम आरती होती है लेकिन पहले के मुकाबले अब ज्यादा लोग इसमें शामिल होने लगे हैं। इन घाटों के सौंदर्यीकरण के लिए अभी तक 300 करोड़ रुपए लगाए जा चुके हैं और काम अब भी जारी है।

हाई मास्ट और स्ट्रीट लाइट्स के अलावा यहां छोटे-छोटे फूड कियोस्क भी खुल गए हैं और इसे एक पर्यटन केंद्र के तौर पर भी डेवलप किया जा रहा है। इन घाटों पर पहले लोग पहले सिर्फ आरती के वक्त आते थे लेकिन अब वे लोग यहां घूमने टहलने भी आने लगे हैं।

Namami_Gange

गौरतलब है की 2014 में न्यूयॉर्क में मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, “अगर हम इसे साफ करने में सक्षम हो गए तो यह देश की 40 फीसदी आबादी के लिए एक बड़ी मदद साबित होगी। इसी सोच को कार्यान्वित करने के लिए सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नदी की सफाई के लिए 2019-2020 में बजट को चार गुना करते हुए नदी की सफाई पर 20,000 करोड़ रुपए खर्च करने की केंद्र की प्रस्तावित कार्य योजना को मंजूरी दे दी और इसे 100% केंद्रीय हिस्सेदारी के साथ एक केंद्रीय योजना का रूप दिया।