लाखों करोड़ों के बकाये और मुफ्त बिजली ने देश को बिजली संकट में झोंका

देश में चिलचिलाती गर्मी के बीच में भीषण बिजली संकट पनपा हुआ है। केंद्र सरकार का कहना है कि उसके पास बिजली बनाने के लिए पर्याप्त कोयला है। फिर ऐसा क्यों हो रहा है कि लोगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। क्या सियासी फायदे के लिए कछ राज्य अपने नागरिकों को कष्ट सहने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

  राज्यों में बढ़ी बिजली की किल्लत

सबसे पहले बात करते है राजस्थान की जहां इस वक्त सूरज आग उगल रहा है तो दूसरी तरफ बिजली कटौती लोगों को बेहाल कर रही है। आपको बता दें कि ये वही राज्य है जहां लोग महीने में 100 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं, उनका 50 यूनिट फ्री हो जाता है। मतलब वोट की खेती उगाने के लिये राजस्थान बिजली फ्री करके लोगों को खुश करने में लगी है। जबकि अगर राजस्थान की देनदारी की बात करें तो करीब 11685 करोड़ रूपये के करीब है। अब बात पंजाब की करते हैं जहां बिजली की मांग 8 हजार मेगावॉट पहुंच चुकी है, जबकि सप्लाई 5 हजार मेगावॉट है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर की वजह से पंजाब में भी कई घंटों की बिजली कटौती शुरू हो गई है। यहां पर आम आदमी पार्टी की सरकार के आने के बाद से हर घर को हर महीने 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही है। इसी तरह दूसरे राज्यों में भी बिजली की जमकर कटौती हो रही है और ये इसलिये क्योंकि इन राज्यों ने कोयला कंपनियोंको भुगतान तय समय से नहीं किया है जिससे इनको कोयला मिलने में दिक्कत हो रही है और राज्यों में बिजली संकट पैदा हो गया है। ना ही कोयले की कमी के कारण ऐसा हो रहा है। इतना ही नही इस संकट को आप ऐसे भी समझ सकते हैं कि गर्मियों में बिजली की डिमांड बढ़ती है तो राज्यों को उसके लिए अतिरिक्त बिजली खरीदने की जरूरत पड़ती है, कोयला कंपनियों का बिल भरना उनके एजेंडे में नहीं होता है, इसीलिए वो जितना कोयला मिल रहा है उसी में संतोष कर लेते हैं, यानि उनके बिजली घर बढ़ी डिमांड के हिसाब से अतिरिक्त बिजली बना नहीं पाते। राज्यों के पास ग्रिड से अतिरिक्त बिजली खरीदने का विकल्प होता है, वो 12 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीद कर बढ़ी हुई मांग की पूर्ति कर सकते हैं लेकिन राज्य सरकारें ऐसा नहीं करते और इसके बाद बिजली कटौती का मैप तैयार करती हैं। ये तय किया जाता है कि किन इलाकों में कितने घंटे बिजली काट कर मौजूदा स्टॉक में काम चला लिया जाए।

Power-Crisis-in-India-more-than-10-states-Power-cuts-upto-8-hours | Power  Crisis in India: बिजली संकट से मचा हाहाकार, 10 से अधिक राज्यों में हो रही 8  घंटे तक की कटौती | News Track in Hindi

राज्यों ने कोयला कंपनियों को नहीं किया भुगतान

इसी साल 18 अप्रैल तक के केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र ने कोयला कंपनियों को 2 हजार 608 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल है जो अब तक 1 हजार 509 करोड़ रुपए का बिल दबा कर बैठा हुआ है। तीसरे नंबर पर है, झारखंड जिसके सिर पर कोयला कंपनियों का 1 हजार 18 करोड़ रुपया बकाया है। इसके बाद आता है तमिलनाडु, जिसे कोयला कंपनियों का 823.9 करोड़ रुपया भरना है। इसी तरह दूसरे भी कई राज्यों की कोयला कंपनी पर देनदारी है।