एक आईएएस का सन्देश – बोर्ड्स के रिजल्ट पर नहीं अपनी काबिलियत पर भरोसा करे बच्चें

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Awanish_Sharan

बीते हफ्ते अधिकतर स्कूल बोर्ड्स ने अपनी दसवीं और बारहवीं परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया| सफलता प्राप्त करने वालों बच्चों का मन प्रसन्नता से भरा हुआ था, उनके अभिभावक अपने बच्चों की सफलता से काफी खुश थे| सभी शिक्षकों ने भी बच्चों को उनके आने वाले भविष्य की शुभकामनाएं दी ओर जीवन में सफल होने का आशीर्वाद भी दिया|

एक तरफ ख़ुशी की लहर थी तो दूसरी ओर उन बच्चों के लिए ये निराशाजनक रहा जो अपनी परीक्षा पास नहीं कर पाए या जिन बच्चों को कम नंबर आये| सबसे दुःखद बात ये थी की देश के कई हिस्सों से परीक्षा के प्रतिकूल परिणाम के चलते बच्चों के आत्महत्या की ख़बरें आई| ऐसी ही एक खबर आई छत्तीसगढ़ के रायगढ़ ज़िले से, जहाँ एक 18 साल के छात्र ने बोर्ड की परिक्षा में फ़ेल होने की वजह से ख़ुदकुशी कर ली| मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वो छात्र पिछले साल भी फ़ेल हुआ था|

क्या परीक्षा में अच्छे नंबर ना आना ज़िन्दगी में हार जाना है? आज सबसे बड़ा सवाल यही है? क्या सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम हमारे ज़िन्दगी की रूपरेखा तय करेगा? क्या अच्छे नंबर नहीं आने पर ज़िन्दगी ख़त्म कर लेना सही चुनाव है?

CG_ias

इसी खबर को सुनकर 2009 बैच के एक IAS अधिकारी अवनीश कुमार शरण, जो कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ के कबीरधाम ज़िले के मजिस्ट्रेट हैं, ने फेसबुक पर पोस्ट कर अपने परिणामों को साझा किया ओर यह भी कहा की उन्हें भी दसवीं और बारहवीं में कोई बहुत अच्छे नंबर नहीं आये थे, पर फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी, अपनी काबिलियत पर भरोसा किया और आज वो एक आईएएस के तौर पर कार्यरत हैं|

हमारी ज़िन्दगी का एकमात्र लक्ष्य सिर्फ परीक्षा में उत्तीर्ण होना या अच्छे नंबरों से पास होना नहीं है| ओर ये भी ज़रूरी नहीं कि अगर हमारे नंबर अच्छे नहीं हैं, तो हमारा करियर ख़त्म हो गया, और अब इसके आगे हम जीवन में कोई लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते| हम ये भी तो सोच सकते हैं कि कोई बात नहीं, क्या हुआ अगर हमें अच्छे नंबर नहीं आये, हम और कोशिश करेंगे, पहले से ज्यादा मेहनत करेंगे ओर आगे होने वाले प्रतियोगी परीक्षाओ में अच्छा करेंगे|

दो शब्द तो अभिभावकों के लिए भी, सभी बच्चे एक जैसे नहीं होते है, कुछ बच्चों में पढने की खूबी होती है, कुछ बच्चों में खेलने की, वहीँ कुछ बच्चों में ओर भी बहुत कुछ अलग करने की खूबी होती है| आप सब से इतना अनुरोध है की अपने बच्चों की तुलना किसी और बच्चों से न करे| इससे उनकी आत्मविश्वास को गहरी चोट पहुँचती है| ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जब अपनी प्रारंभिक शिक्षा में कुछ भी उल्लेखनीय न करने के बाद भी कई लोगों ने अप्रतिम सफलता प्राप्त की है|

भौतिकी में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले, अल्बर्ट आइन्स्टीन दसवीं तक गणित में कमजोर थे| क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी अपनी बोर्ड परीक्षा में असफल रहे थे| अगर उनकी प्रतिभा को सिर्फ उनके बोर्ड के नंबर से आंका जाता तो वो आज इंडियन एयरफोर्स के मानद कैप्टेन नहीं होते|

 


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