माया के भाई की माया, 400 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त

Maya's brother'sमोदी राज में भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं है| अब तक जो कानून के नज़रों से बचते आ रहे थे, उनके हर गलत कामों का हिसाब अच्छे से लगाया जा रहा है| इसी क्रम में बीएसपी सुप्रीमो मायावती के भाई और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार जो करीब 3 साल से ED के राडार पर थे, बीते गुरुवार को उनके लगभग 7 एकड़ के प्लॉट को बेनामी संपत्ति करार देकर जब्त कर लिया गया है|

बताया जा रहा है की इस प्लाट की कीमत 400 करोड़ के करीब है| इसके साथ ही बेनामी संपत्ति रखने वालों के खिलाफ मोदी सरकार ने अपना मोर्चा खोल दिया है।

सूत्रों के मुताबिक नोएडा व ग्रेटर नोएडा में 2007 से लेकर 2017 तक में कई लोगों ने अपने कालेधन को छुपाने के लिए बेनामी सम्पत्ति खरीदी है| इनमे कुछ बिल्डर्स को मॉरिशस कनेक्शन के ज़रिये मनी लांड्रिंग आरोप में शक के दायरे में रखा गया है|

सोमैया की शिकायत पर सामने आया मामला

जानकारी के अनुसार साल 2011 में बीजेपी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने आनंद कुमार पर फर्जी कंपनियां संचालित करने का आरोप लगाया था। बाकायदा उन्होंने इसकी शिकायत चीफ जस्टिस, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, और ईडी से भी की थी। पर केंद्र में शासन कर रही कांग्रेस सरकार ने इसके खिलाफ कोई कारवाई नहीं की|

2014 में मोदी सरकार के आने के बाद इन पर कार्रवाई शुरू हुई| खबर ये भी आई थी कि नोटबंदी के दौरान आनंद ने दिल्ली के एक बैंक में अपने खाते में एक करोड़ 43 लाख रूपये की नकदी जमा कराई थी| साथ ही ये भी पता चला कि प्रदेश में जब उनकी बहन की सरकार थी तब आनंद ने करीब 49 कंपनियां शुरू की थी।

तीन सालों से इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नज़र थी आनंद पर

कुछ ही सालों में खरबपति बने आनंद के संपत्तियों पर आयकर विभाग पिछले तीन साल से निगरानी कर रहा है| सूत्रों की माने तो आनंद ने कई कंपनियां अपनी पत्नी विचित्र लेखा के नाम पर रजिस्टर करा रखे हैं| वर्ष 2007 से 2012 के बीच जब प्रदेश में मायावती की सरकार थी तभी एक कंपनी के नाम पर सेक्टर 94 में करीब 7 एकड़ का कॉमर्शियल प्लॉट खरीदा गया था, जिसकी जानकारी आयकर विभाग की दिल्ली बेनामी जांच यूनिट ने 3 साल पहले ही दी थी,और तभी से यह प्लाट आयकर विभाग के नज़र में टिका हुआ था।

क्यों जब्त किया गया 7 एकड़ का प्लॉट

सूत्रों के मुताबिक नोएडा में सेक्टर-94 के जिस प्लॉट को जब्त किया गया है उसे खरीदने के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था| 28,328 वर्ग मीटर के इस प्लाट को विजन टाउन प्लानर नामक कंपनी से करीब 6 करोड़ में मार्च 2011 में खरीदा गया था। इसके बाद बोगस नाम की कंपनी ने इस प्लाट पर 400 करोड़ रूपये का भुगतान किया था| आयकर विभाग ने जब आनंद कुमार से इस बारे में पूछा तो वह इसका जवाब नहीं दे सके कि यह पैसा किसका है, और इसीलिए इस प्लाट को बेनामी संपत्ति करार कर के जब्त कर लिया गया।

सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग के बाद अब इस मामले की जाँच सीबीआई और ईडी भी कर सकती है| वैसे तो मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सारी पार्टिया कमज़ोर पड़ गयी है पर अब देखना ये है कि मायावती के भाई पर इतना गंभीर आरोप लगने के बाद इसका BSP पर क्या असर पड़ता है।