खत्म हुए मसूद अजहर के ‘अच्छे दिन’, UN ने आतंकियों की ब्लैक लिस्ट में किया शामिल

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जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर (Masood Azhar) को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया गया है| यूएन ने मसूद अजहर (Masood Azhar Global terrorist) का नाम ब्लैक लिस्ट में डाल दिया है। भारत लंबे समय से मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आंतकी घोषित करने की मांग कर रहा था। मसूद अजहर (Masood Azhar Global terrorist) को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करने को लेकर इस बार चीन ने कोई अड़ंगा नहीं लगाया है। मसूद अजहर पर भारत में कई बड़े आतंकी हमले कराने का आरोप है। इनमें संसद पर हमला, पुलवामा हमला और पठानकोट हमला मुख्य रूप से शामिल हैं। पुलवामा में आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले जैश-ए-मोहम्मद का आका मुखिया मसूद अजहर ही है। बता दें कि अजहर का संबंध हरकत-उल अंसार से भी रहा है | पहली बार अजहर को 1994 में गिरफ्तार किया गया था। उसको श्रीनगर में गिरफ्तार किया गया था। कंधार विमान कांड के बाद भारतीय जेलों में बंद मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक ज़रगर और शेख अहमद उमर सईद जैसे चरमपंथी नेताओं की रिहाई की मांग की गई और छोड़ दिया गया।

साथ ही आपको बता दें कि वैश्विक आतंकी घोषित होने के बाद जब्त होंगी जैश सरगना मसूद अजहर की सभी संपत्तियां|

जेल से छूटने के बाद मौलाना मसूद अजहर ने फरवरी 2000 में जैश-मोहम्मद नाम के आतंकी संगठन की नींव रखी जिसका मकसद था भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देना। साल 2001 में भारतीय संसद में हमला हुआ जिसके पीछे जैश-ए-मोहम्मद का ही हाथ था। पाकिस्तान में उसे गिरफ्तार कर लिया गया और लेकिन उसके खिलाफ सबूत नहीं दिए जाने से लाहौर हाइकोर्ट ने उसे छोड़ने के आदेश दिए गए। आतंकी मसूद अजहर के नापाक इरादों से अमेरिका भी अछूता नहीं रहा| साल 2002 में अमेरिकी पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या की गई। इस घटना के बाद अमेरिका ने मसूद अजहर को मांगा| साल 2003 में परवेज मुशर्रफ पर भी आत्मघाती हमला हुआ। इसके बाद उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया| दबाव बढ़ने के बाद उसे नजरंबद और हिरासत में ले लिया गया| लेकिन वह बच निकलने में कामयाब रहा।

बता दें कि चीन ने जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर (Masood Azhar) को वैश्विक आतंकी घोषित करने को लेकर एक बड़ा बयान दिया था। चीन ने मंगलवार को कहा था कि मसूद अजहर (Masood Azhar) को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के जटिल मुद्दे का उचित समाधान निकाला जाएगा। हालांकि चीन ने इसके लिए कोई समय सीमा नहीं बताई है। खास बात यह है कि कुछ दिन पहले यहां पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की मुलाकात के बाद चीन का यह रुख आया था। चीन ने पाकिस्तानी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख (Masood Azhar) पर प्रतिबंध लगाने के एक नये प्रस्ताव पर मार्च में तकनीकी रोक लगा दी थी। जैश ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी ली थी| चीन ने अजहर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी घोषित करने के चौथे प्रयास पर रोक लगा दी थी|

संयुक्त राष्ट्र के फैसले का फ्रांस ने किया स्वागत

फ्रांस सुरक्षा परिषद के फैसले का स्वागत करता है, फ्रांस कई सालों से अजहर को आतंकी घोषित करवाने की कोशिश में जुटा था, जो फरवरी में हुए पुलवामा हमले का भी जिम्मेदार है। फ्रांस सरकार ने मसूद पर 15 मार्च को ही प्रतिबंध लगा दिया था। फ्रांस की कोशिशों पर आज सुरक्षा परिषद ने भी मुहर लगा दी।

बीजेपी ने कहा- ये पीएम मोदी की आतंक पर जीत

मसूद अजहर पर कार्रवाई होने के बाद बीजेपी ने कहा कि ये आतंक के खिलाफ पीएम मोदी की बड़ी जीत है। ट्विटर पर बीजेपी ने लिखा, ‘भारत को मिली आतंकवाद के खिलाफ ऐतिहासिक सफलता। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पुलवामा आतंकी हमले का दोषी मसूद अजहर अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित। मोदी है तो मुमकिन है’

मसूद अजहर की चल-अचल संपत्ति होगी फ्रीज

अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने के बाद अब मसूद अजहर यूएन के सदस्य राष्ट्र देशों की यात्रा नहीं कर पाएगा। मसूद की चल-अचल संपत्ति फ्रीज की जाएगी. यूएन से जुड़े देश उसकी मदद नहीं कर पाएंगे। उसे हथियार नहीं दे पाएंगे।

मसूद अजहर का कश्मीर कनेक्शन

पूरी दुनिया जानती है कि मसूद अजहर आतंकवादी है और पाकिस्तान इस आतंकवादी की पनाहगार है। अब तो मसूद अजहर आधिकारिक तौर से ग्लोबल आतंकवादी घोषित किया जा चुका है। ऐसे में उसका आतंकी बायोडाटा पर एक नजर डाल लेते हैं। 90 के दशक से ही मसूद अजहर जम्मू-कश्मीर में एक्टिव रहा है. 1994 में उसे श्रीनगर से गिरफ्तार किया गया था. मगर, कंधार कांड के बाद भारत सरकार को उसे रिहा करना पड़ा था। उसी के बाद से वह भारत के लिए चिंता का विषय बन गया।

भारत से रिहा होने के बाद मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद नाम का संगठन बनाया, जिसने अभी तक हिंदुस्तान में कई आतंकी वारदातों को अंजाम दिया है। भारत में किन हमलों के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का हाथ. 2001 में संसद पर हमला, 2016 में पठानकोट हमला, 2018 में पठानकोट हमला और 2019 में पुलवामा आतंकी हमला। ये तो वो आतंकी हमले हैं, जिनका ध्यान पूरी दुनिया की तरफ गया। लेकिन इसके अलावा भी कश्मीर में रोजाना जो छोटे आतंकी हमले होते हैं या सेना के साथ मुठभेड़ होती हैं। उसमें भी जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी शामिल रहते हैं।


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