पुलवामा एनकाउंटर में शहीद मेजर विभूति की पत्नी भारतीय सेना में बनेंगी अफसर

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बीते साल पुलवामा में हुआ आतंकी हमले में देश के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस हमले के बाद 18 फरवरी को देहरादून के मेजर विभूती ढौंडियाल भी जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ चले ऑपरेशन में शहीद हो गए थे। जिसके कुछ दिनों के बाद भारतीय वायुसेना ने एयरस्ट्राईक कर दुश्मनों से बदला लिया था।

शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के अदम्य साहस को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से अलंकृत किया गया है। उन्होंने न केवल कई सैन्य ऑपरेशन में हिस्सा लिया, बल्कि इन ऑपरेशन में कई आतंकियों का सफाया भी किया। पुलवामा एनकाउंटर के बाद उस रात सेना ने ऑपरेशन शुरू किया तो आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। टीम का नेतृत्व कर रहे मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के गले और सीने में गोली लग गई। पर मेजर विभूति और उनकी टीम ने आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया और इस कार्रवाई में दो आतंकवादी मारे गए। इसी मुठभेड़ में पुलवामा हमले का मास्टर माइंड अब्दुल राशिद गाजी भी ढेर हो गया था।

मेजर की पत्नी बनेंगी सेना में अफसर

अब मेजर विभूती ढौंडियाल की पत्नी निकिता ढौंडियाल पति की शाहदत के बाद उनकी ही राह पर चल पड़ी है। जल्द ही निकिता ढौंडियाल सेना में अफसर के रूप में नजर आएंगी। उन्होंने इससे जुड़ी सभी परीक्षाएं भी पास कर लिया है। खबरें आ रही हैं कि जल्द ही वह सेना ज्वाइन कर सकती हैं। आज शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल की पहली बरसी है और आज ही ऐसी खबर आई है कि मेजर की पत्नी निकिता जल्द ही सेना में अफसर के रूप में नजर आएंगी।

बता दे की निकिता ने जब विभूति की शहादत पर ‘आई लव यू विभू’ जैसे मार्मिक शब्दों से पति को अंतिम विदाई दिया था, और उन्हें सैल्यूट किया था तो सारा देश गम के सागर में डूब गया था। शहीद पति को अंतिम विदाई देते वक्त उन्होंने जो हिम्मत दिखाई, वह अब भी उनके हौसले को बयां करती है। बताया जा रहा है कि निकिता ने पहले ही आर्मी ज्वाइन करने की इच्छा जताई थी। उसके बाद सेना ने उनका उत्साह बढ़ाया और मदद की, जिसका परिणाम यह हुआ कि निकिता ने सभी औपचारिक टेस्ट और इंटरव्यू पास किए। मूलरूप से पौड़ी के ढौंडी गांव निवासी ढौंडियाल परिवार के लिए मेजर बेटे की शहादत कभी न भरने वाला जख्म दे गया है।

मेजर विभूति का परिचय

शहीद मेजर विभूति को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। 12वीं में एनडीए की परीक्षा दी, लेकिन इसमें उनका चयन नहीं हुआ। ग्रेजुएशन के बाद उनका चयन हुआ और ओटीए चेन्नई में प्रशिक्षण हासिल किया। वर्ष 2012 में पासआउट होकर उन्होंने कमीशन प्राप्त किया।

मेजर विभूति का विवाह 18 अप्रैल 2018 को हुआ था। इसके ठीक दस माह बाद मेजर विभूति शहीद हो गए थे। मेजर विभूति जनवरी के पहले सप्ताह में छुट्टियां खत्म कर डयूटी पर लौटे थे। मार्च में विभूति ने घर आने का वादा किया था। फिलहाल विभूति के घर में 95 वर्षीय दादी, मां, पत्नी और एक अविवाहित बहन है।

मेजर विभूति को श्रद्धांजलि

आज शहीद मेजर विभूति की बरसी पर उनके डंगवाल मार्ग स्थिति आवास पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया है। विभूति के परिजन भी आवास पर पहुंचे हैं। इस दौरान विभूति के नाम पर मेजर विभूति स्मृति समिति की घोषणा की जाएगी, जो शहीद की यादों को जिंदा रखने के लिए भविष्य में अनेक कार्यक्रम आयोजित करेगी।

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