मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बढ़ी रफ्तार, जनवरी में आठ साल के उच्चतम स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई

Manufacturing sector picks up

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में लगातार प्रगति कर रहा है। देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में काफी तेजी आयी है।

साल 2020 के पहले माह यानी जनवरी में देश में विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियों में सुधार हुआ है। मासिक सर्वेक्षण आईएचएस मार्किट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई इंडेक्स (मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई) जनवरी में 55.3 अंक रहा है। यह आंकड़ा साल 2012 से 2020 की अवधि में सबसे ऊंचा स्तर है। यानी यह आठ साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है।इससे पिछले माह यानी दिसंबर में यह 52.7 अंक था। पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 53.9 अंक था। लगातार 30वें महीने मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 50 अंक से ऊपर रहा है।

पीएमआई का 50 से नीचे जाना गतिविधियों में कमी को दर्शाता है

मालूम हो कि पीएमआई का 50 अंक से ऊपर रहना गतिविधियों में विस्तार को दर्शाता है। वहीं 50 अंक से नीचे रहना दबाव के रुख को दर्शाता है। इसलिए नीति निर्माण में इस इंडेक्स का ध्यान रखा जाता है। इस संदर्भ में आईएचएस मार्केट की प्रधान अर्थशास्त्री पॉलियेना डि लीमा ने कहा कि, ‘जनवरी में भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ में मजबूती लगातार बनी हुई है। पिछले आठ सालों में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिली है।’

अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर

मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई में सुधार आना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर है। मांग में सुधार आने से पीएमआई उच्च स्तर पर पहुंचा है। इसके कारण नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन, निर्यात और विनिर्माण के लिए खरीदारी में बढ़त देखी गई है। एक निजी सर्वे में सामने आया है कि मांग में आई उछाल से कारखानों में मजदूरों की मांग बढ़ गई है। जिस रफ्तार से कारखानों में नए मजदूरों की भर्ती की गई, वह पिछले आठ सालों में सबसे अधिक है।

एक नजर डालते हैं उन संकेतों पर, जिनसे साफ जाहिर होता कि मोदी सरकार में अर्थव्यवस्था तेज रफ्तार से बढ़ रही है।

एफपीआई ने 2019 में किए 1.3 लाख करोड़ रुपए निवेश

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। देश में कारोबारी माहौल भी बेहतर हुआ है। यही वजह है कि देश में रिकॉर्डतोड़ विदेशी निवेश हो रहा है। मोदी सरकार की नीतियों की वजह से प्रभावित होकर अनुकूल आर्थिक परिस्थितियों और पर्याप्त तरलता के कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने 2019 में भारतीय पूंजी बाजार में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 2019 में भारतीय पूंजी बाजार में 1.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरीज लिमिटेड के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई ने 2019 में घरेलू पूंजी बाजार में अब तक 1,33,074 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया है। एफपीआई ने इक्विटी में 2019 में 97,251 करोड़ रुपए का निवेश किया, जबकि 26,828 करोड़ रुपए के ऋणपत्रों की शुद्ध खरीदारी की। एफपीआई ने हाइब्रिड प्रतिभूतियों में 999 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी की।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी

प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

विदेशी मुद्रा भंडार ने बनाया रिकॉर्ड

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। मोदीराज में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार तीन जनवरी तक बढ़कर 461.157 अरब डॉलर के नए स्तर पर पहुंच गया। यह विदेशी मुद्रा भंडार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति में वृद्धि की वजह से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है। विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 3.013 अरब डॉलर बढ़कर 427.949 अरब डॉलर हो गई। इस दौरान स्वर्ण भंडार भी 66.6 करोड़ डॉलर बढ़कर 28.058 अरब डॉलर हो गया।

बता दे की विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।