मनसुख भाई के हौसले ने जमका गांव (गुजरात) में पानी संचय करके दुनिया को दिखाया नया रास्ता 

कहते है अगर हौसले बुलंद हो तो मंजिल जरूर मिलती है और इस कथन को सच करके दिखाया है गुजरात के रहने वाले मनसुख भाई ने जो एक बार अपने रिश्तेदार के घर जूनागढ़ के जामका गांव गये जहां उन्होने पानी की किल्लत को देख उनका मन बहुत दुखी हुआ जिसके बाद तो उन्होने गांव की किस्मत ही बदल दी।

जामका गांवपानी संचय के लिये बना उदाहरण

बीते दो दशक पहले जिस गांव का आलम ये था कि यहां पानी लाने के लिये लोगों को अपने ट्रैक्टर के पीछे टैंकर बांधकर मीलो दूर से पानी लाना होता था। इसके साथ साथ पानी न होने के कारण यहां फसल भी नही होती थी।  वैसे बारिश भी इस इलाके में कभी हो जाये तो बड़ी बात होती थी जिसकी वजह से 800 बीघे से ज्यादा उपजाऊ जमीन बंजर पड़ी हुई थी। लेकिन इस हालात से दुखी हुए राजकोट के रहने वाले मनसुख भाई ने हालात को बदलने की सोचा जिसके बाद उन्होने गांव वालों को बुलाया सरपंच को बुलाया और कहा कि कुछ पैसे मैं देता हूं कुछ पैसे आप लोग इकट्ठा करो और बारिश की एक-एक बूंद को संग्रह करने का प्लानिंग बनाओ। देखते ही देखते गांव वालों ने 10 लाख रुपए इकट्ठा कर दिया गांव के सभी लोग जल संचय के लिए तैयार हो गए और मनसुखभाई के निर्देश के अनुसार सूखे हुए तालाब से मिट्टी निकाला गया जल स्रोत की सफाई की गई। नाले में जमी रेतीको हटाया गया और 51 बड़े और 30 छोटे चेक डैम बनाए गए।चेक डैम बनाने से सिर्फ 5 साल के अंदर ही गांव वालों को लगा कि अब उनकी तकदीर बदल रही है और देखते ही देखते हैं आज इस गांव की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है इस गांव के बगल से दो प्राकृतिक नाले अविरल रहते हैं गांव का तालाब लबालब भरा रहता है वाटर लेवल बहुत ऊपर आ गया है और आज गांव की जमीन कपास मूंगफली और दूसरे फसल से लहलहा उठी है।

गांव में पानी आया तो बढ़ा रोजगार

जब गांव में पानी की किल्लत दूर हुई तो सबसे पहले तो खेती खूब होने लगी इसके साथ साथ गांव के लोगों ने खुद को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गिर की प्रख्यात नस्ल की गायों लेकर एक बहुत बड़ा गौशाला बनाया है और इस गौशाला के उत्पाद 21 से ज्यादा देशों में निर्यात हो रहे हैं गांव के लोगों को गांव में रोजगार मिला और आज इस गांव में दुनिया के तमाम देशों को राह दिखाया है की हर बात पर सरकार से पर निर्भर होने के बजाय यदि हम बदलाव ठान ले तो बहुत आसानी से बदलाव लाया जा सकता है। इतना ही नही गांव वालों की मेहनत का नतीजा है कि आज देश के ही नही बल्कि विदेश की भी कई जानीमानी हस्तियां इस इलाके का दौरा कर चुकी है। विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी, रतन टाटा बाबा रामदेव सहित खुद संघ नरेंद्र मोदी जी तो पाकिस्तान के सिंध सुबे के जल मंत्री और दो बार यूनाइटेड नेशन ने अपनी टीम को इस गांव का अध्ययन करने को भेजा है। जो ये बताता है कि आज इस गांव ने आखिर क्या कर दिखाया है।

वैसे भारतीयों की शक्ति को मोदी सरकार अच्छी तरह से जानती है तभी लगातार सरकार जल संकट को दूर करने के लिये मोदी जी जनभागीदारी की वकालत करते है जिससे देश में जल संकट खत्म हो सके।