मोदी की कूटनीति से मलेशिया की निकली अकड़

मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद को भारत के आतंरिक मामलों में टिप्पणी करना भारी पड़ गया है। कश्मीर और नागरिकता कानून के विरोध के बाद मलेशिया को पाम तेल को बेचने में बड़ी मुश्किलों का सामना कर रहा है। भारत ने मलेशिया से पाम ऑइल (Palm Oil) के आयात में कटौती कर दी है। लिहाजा वहां पाम ऑयल की कीमतें 11 साल के सबसे नीचले स्तर पर पहुंच गई हैं। मलेशिया पाम ऑयल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। कीमतों में आ रही गिरावट के चलते मलेशिया खासा परेशान है और अब वो भारत के साथ बातचीत की तैयारी में है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, आयात पर लगे प्रतिबंध के बाद भारतीय बंदरगाहों पर हजारों टन पाम तेल फंसा हुआ है। भारत सरकार ने 8 जनवरी को मलेशिया से रिफाइंड तेल के आयात पर लगाम लगाने की घोषणा की थी ताकि घरेलू रिफाइनरियों की मदद की जा सके। भारत में साबुन बनाने से लेकर कुकीज बनाने तक खाद्य तेल इस्तेमाल किया जाता है और भारत खाद्य तेल के लिए पूरी तरह से आयात पर ही निर्भर है।

भारत पिछले पांच वर्षों से मलेशिया के पाम तेल का सबसे बड़ा बाजार रहा है। अब इसके बहिष्कार से मलेशिया को नया बाजार ढूंढना होगा, लेकिन उसके सामने संकट यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में तेल खरीदने वाला कोई एक बाजार मिलना लगभग नामुमकिन है। खाद्य तेल के दूसरे सबसे बड़ा उत्पादक देश मलेशिया से मुंह मोड़ने के बाद भारत ने इंडोनेशिया से आयात करना शुरू कर दिया है। पिछले पांच सालों में मलेशिया के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार रहा है लेकिन कूटनीतिक विवाद का असर दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों पर देखने को मिल रहा है। यही कारण है की शुक्रवार को मलेशियाई पाम फ्यूचर की कीमतों में पिछले 11 सालों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

इसके बाद प्रधानमंत्री महातिर के तेवर नरम पड़ने लगे है और अपने सुर को बदलते हुए मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने सोमवार को कहा कि वह भारत के खिलाफ किसी तरह की जवाबी कार्रवाई नहीं करेंगे। महातिर ने कहा था कि हम भारत के खिलाफ कोई जवाबी कार्रवाई करने के लिए बहुत छोटे देश हैं। हमें इस समस्या से बाहर निकलने के लिए दूसरे तरीकों और साधनों का इस्तेमाल करना होगा।

बता दें कि 2019 में भारत मलेशिया के खाद्य तेल का सबसे बड़ा खरीदार था। साल 2019 में भारत ने मलेशिया से 40 लाख टन तेल आयात किया था। भारतीय व्यापारियों का कहना है कि अगर मलेशिया के साथ रिश्ते नहीं सुधरते हैं तो यह खरीदारी 10 लाख टन से भी नीचे जा सकती है।

आर्टिकल 370, CAA पर बिगड़ी बात

मुस्लिम बहुल देश मलेशिया के 94 वर्षीय प्रधानमंत्री महातिर तमाम मौकों पर कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी करने को लेकर भारत सरकार की तीखी आलोचना कर चुके हैं। मलेशियाई प्रधानमंत्री ने भारत के नागरिकता (संशोधन) कानून, 2019 की भी आलोचना की थी। उन्होंने आर्टिकल 370 हटाए जाने को कश्मीर पर भारत का आक्रमण बताया था। उन्होंने सीएए पर निंदा करते हुए कहा कि यह ‘बिल्कुल अनुचित’ है।

जाकिर नाइक पर भी अड़ा है मलेशिया

मलेशिया ने इस्लामिक धर्मगुरु जाकिर नाइक को भी शरण दे रखी है। भारत ने नाइक के पर्मानेंट रेजिडेंट स्टेटस वापस लेने की मांग की थी जिसे मलेशिया ने ठुकरा दिया था। स्वाभाविक है कि भारत इससे भी नाराज है। नाइक मनी लॉन्ड्रिंग और नफरत फैलाने वाले भाषण देने के आरोपों में भारत में वांछित है। वह तीन साल पहले भारत से भागकर मलेशिया में रह रहा है।