मेक इन इंडिया से बढ़ा भारत का खजाना

कोरोना संकट के वक्त जहां समूची दुनिया आर्थिक तंगी से दो चार हो रही है आलम ये है कि विश्व में सबकी ग्रोत नीचे जा रही है, लेकिन ऐसे खराब वक्त में भी भारत के प्रति विश्व का भरोसा बढ़ रहा है। जो मेक इन इंडिया की कामयाबी बता रहा है। जिसके चलते भारत का विदेशी मुद्रा भंडार इस कठिन वक्त में भी 50 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

FDI में रिकॉर्ड बढोत्तरी

लगता यही है कि विश्व का नजरिया भारत को लेकर बदला तभी आज देश में विदेशी कंपनिया खूब निवेश करने में जुट गई है। जिसका असर ये देखा जा रहा है कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार का खजाना 50 अरब डॉलर के करीब पहुंच गया है। 13 फीसद की वृद्धि के साथ देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 49.97 अरब डॉलर करीब 3.75 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वित्त वर्ष 2018-19 में 44.36 अरब डॉलर का एफडीआइ आया था। री-इन्वेस्टेड अर्निंग और अन्य कैपिटल समेत 2019-20 में कुल एफडीआइ साल भर पहले के 62 अरब डॉलर से बढ़कर 73.45 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यह बढ़ोतरी 18 फीसद की रही है। वित्त वर्ष 2019-20 में सर्विस सेक्टर में सर्वाधिक 7.85 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर एवं हार्डवेयर सेक्टर में 7.67 अरब डॉलर, टेलीकम्युनिकेशन में 4.44 अरब डॉलर, ट्रेडिंग में 4.57 अरब डॉलर, ऑटोमोबाइल में 2.82 अरब डॉलर, कंस्ट्रक्शन में दो अरब डॉलर और रसायन सेक्टर में एक अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया। भारत में निवेश के मामले में सिंगापुर लगातार दूसरे साल सबसे आगे रहा।

विदेशी कंपनियों के लिये भारत का महौल अनकूल

ऐसा इसलिये हो रहा है क्योंकि मोदी सरकार की तरफ से विदेशी कंपनियो को लुभाया जा रहा है। मसलन यहां पर कंपनियों से कॉरपोर्टे टैक्स सबसे कम लिया जा रहा है तो बैंको के द्वारा कर्ज लेने में कई तरह की छूट भी दी जा रही है। सबसे बड़ा फर्क दूसरे देशों के अपेक्षा ये देखा जा रहा है कि यहां काम करने वाले लोग काफी कुशल और बेहतर हैं। जिस कारण से कंपनियां भारत में व्यवसाय लगाने में ज्यादा इच्छुक दिख रही है। इतना ही नही जानकारों की माने तो लॉकडाउन खत्म होते ही चीन से 600 कंपनियां भारत में अपना काम शुरू करने का विचार बना रही है। इसके पीछे भी वजह यही माना जा रहा है कि दुनिया में सबसे ज्यादा सहूलियत इस वक्त करोबारियों को यहीं मिल रही है। इतना ही नही भारत खुद भी मेक इन इंडिया के तहत मजबूत हो रहा है तभी तो जहां भारत में कोरोना संकट के शुरूआती दिनो में एक भी पीपीई किट का निर्माण नही होता था तो आज भारत 5 लाख से ज्यादा किट एक दिन में बना रहा है और विदेश में भेज भी रहा है जिसका असर ये देखा गया है कि भारत आज पीपीई किट उत्पादन करने वाले देश की लिस्ट में दूसरे नबंर पर पहुंच गया है।

मतलब साफ है कि आत्मनिर्भर बनने के मंत्र के साथ अब विदेशियों को लुभा नहीं रहे बल्कि उन्हे भारत में निवेश करने के लिये प्रबल तौर पर तैयार भी कर रहे हैं। और ये सब कुशल सरकार की कुशल आर्थिक नतीजो के कारण ही हो पा रहा है। जिसके चलते संकट के दौर में भी हम सफल हो रहे है,  कोरोना से भी और आर्थिक संकट से भी।