चीन को भारत की दो टूक, पुरानी स्थिति को मानो वरना अंजाम के लिये तैयार रहो

चालबाज चीन लगातार लद्दाख में भारत से सटी सीमाओं पर अपनी चालबाजी दिखा रहा है, जिससे  यह साफ हो जाता है कि वह शांति से बात करने के मूड में नहीं हैं। हालांकि इसको लेकर मोदी सरकार भी पूरी तरह से आश्‍वस्‍त है और उसका मानना है कि यह बात अब आसानी से बनने वाली नहीं और इसमें समय भी लग सकता है। इसके साथ ही सीमा पर किसी भी तरह के तनाव को बढ़ने के लिए मानिसक रूप से तैयार रहने की हिदायत भी दी गई है।

भारत ने सेना को आगे बढ़ाया

भारत चीन सीमा को लेकर विवाद हर दिन बढ़ता जा रहा है। दोनो मुल्क की सेना एक दूसरे के सामने खड़ी दिख रही है। इतना ही नही भारत और चीन दोनो ही सेना का जमावड़ा भी बढ़ाते जा रहे हैं। जानकारो की माने तो भारत इसको लेकर काफी सजग हो गया है और उसने सेना को खुली  छूट दे दी है साथ ही साथ चीन से सटी 3,488 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा पर सैनिकों की संख्‍या के साथ-साथ सैन्य उपकरणों और युद्ध सामग्री को विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ा दिया गया है। अधिकारी ने कहा कि कोविड-19 महामारी की चुनौती से जूझने के बावजूद सशस्त्र बलों को किसी भी आगे के घटनाक्रम का जवाब देने के लिए पर्याप्त हथियारों के साथ आगे बढ़ने को कह दिया गया है। इतना ही नही लद्दाख में भारतीय सेना ने वायुसेना के साथ मिलकर किसी भी जंग वाली स्थिति से निपटने के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। इसको लेकर उन्होने अभ्यास भी किया है। जिससे किसी भी स्थिति से निपटा जा सके।

चीन के अड़ियल रवैया पैदा कर रहा है गतिरोध

चालबाज चीन की फितरत में धोखा है और इसी फितरत और अड़ियल रवैये के कारण लगातार बातचीत  में गतिरोध पैदा हुआ है। अधिकारी ने कहा कि यह समझना मुश्किल है कि खासतौर पर तब क्यों जब वे सभी वार्ताओं में जोर देते रहे कि यह उनका क्षेत्र है। हालांकि जैसा कि दोनों पक्षों ने बात करने के लिए सहमति व्यक्त की है,  अपने आप में एक अच्छी बात है। बीजिंग में राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है और सैन्‍य स्‍तर पर 6 जून और 22 जून को कोर कमांडरों के स्तर पर दो राउंड की वार्ता लद्दाख में हुई है। इन वार्ताओं के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल का मुख्य एजेंडा रहा है कि अप्रैल से पहले की यथास्थिति को बहाल किया जाए, जिस कारण से दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हुआ था।

राजनाथ ने की सेना प्रमुख से मुलाकात

इस बीच तीन दिवसीय यात्रा के बाद गुरुवार को रूस से वापस आए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख में जमीनी स्थिति की विस्तृत समीक्षा की। राजनाथ सिंह के आधिकारिक आवास पर एक घंटे तक चली इस बैठक में सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने ने उन्‍हें सभी फेसऑफ “घर्षण” बिंदुओं पर एलएसी और बलों की तैयारियों के बारे में बताया। राजनाथ सिंह के साथ सेना प्रमुख की यह पहली मुलाकात थी, जब दोनों पक्षों के कोर कमांडरों ने 22 जून को दूसरी बार मुलाकात की थी। इसमें दूसरी बार डी-एस्केलेशन का रोडमैप तैयार किया गया था। राजनाथ सिंह 22 जून को रूस के लिए रवाना हुए थे और नरवाने 23 जून को लद्दाख गए थे। एलएसी पर चीनी तैनाती की और उनके उद्देश्‍य के बारे में भारत सरकार को कोई जानकारी नहीं थी, इस बारे में सवाल पूछने पर अधिकारी ने कहा कि यह उंगलियां उठाने का समय नहीं है। यह पिछले दो महीनों की घटनाओं की समीक्षा करने का समय है, क्‍योंकि इस दौरान केवल एक बार स्थिति नियंत्रण में लाया गया है। नरवाने भी अपनी लद्दाख यात्रा से गुरुवार को दिल्ली लौटे थे। थल सेना प्रमुख के साथ उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी भी लद्दाख में थे। उन्होंने सैनिकों से मिलने और स्थानीय कमांडरों से बात करने के लिए आगे के क्षेत्रों का दौरा किया था।

मतलब साफ है कि कल तक चीन जो भारत को धमकी दे रहा था आज उसका उलट भारत ने सख्त रूख उसके खिलाफ अपनाते हुए चेतावनी दी है कि अगर वो पुरानी स्थिति को नही मानेगा तो फिर वो अंजाम के लिए तैयार हो जाये। ऐसे में लगता यही है कि चीन वो भूत है जो बिना मार खाये नही जायेगा।