एक भारत श्रेष्ठ भारत की तस्वीर है मकर संक्रांति पर्व

यूं तो देश में कई त्योहार की धूम समूचे देश में देखने को मिलती है लेकिन एक भारत श्रेष्ठ भारत की झलक अगर इसी त्योहार में देखने को मिलती है तो वो है मकर संक्रांति का त्योहार। मकर संक्रांति, हिंदू धर्मावलंबियों के लिए एक ऐसा पर्व, जो नव ज्योत्सना, उल्लास, स्नान-ध्यान, दान और खानपान से जुड़ा है। इस दिन से सूर्य उत्तरायन होते हैं और इसी शुभ अवसर पर कई शुभ कार्यों की शुरुआत करने की परंपरा है। इस त्योहार में तिल और गुड़ के लड्डू, खिचड़ी वगैरह बनाने, दान करने और खाने की परंपरा चली आ रही है।

उत्तर भारत में मकर संक्रांति के नाम ने बनाया जाता है त्योहार

समूचे उत्तर भारत में  सूर्य के उत्तरायण होने पर मकर संक्रांति त्योहार को बड़ी धूमधाम से बनाया जाता है। इस दौरान उत्तर प्रदेश में गंगा स्नान का बड़ा महत्व है। मकर संक्रांति के दिन देश के कई हिस्सों में खिचड़ी बनाई जाती है। बिहार और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में इसे खास तौर पर बनाया जाता है। बिहार और यूपी में तो इस त्योहार को खिचड़ी पर्व भी कहा जाता है। कई जगहों पर तो खिचड़ी में दाल-चावल के साथ-साथ मौसमी सब्जियां भी डाली जाती है। इसका वैज्ञानिक महत्व भी है मौसम में बदलाव के कारण होने वाली बीमारियों के खिलाफ खिचड़ी हमारे शरीर के लिए फायदेमंद होती है। बिहार में तिल से बने सामान के साथ साथ दही चूड़ा खाने की परंपरा युगो से चली आ रही है। वही पंजाब हिमाचल में एक दिन पहले लोहड़ी बनाकर इस पर्व को मनाया जाता है। इसके साथ साथ गुजरात मध्यप्रदेश में कई जगाहो पर विशेष तौर से पतंगबाजी करके शुभदिनो का स्वागत किया जाता है।

दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से त्योहार की रहती है धूम

मकर संक्रांति को देश में कई नामों से जाना जाता है। जहां उत्तर भारत में इसे खिचड़ी के नाम से जानते हैं वहीं दक्षिण भारत में इसे पोंगल कहा जाता है। पोंगल तमिल हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है। यह त्यौहार हमारे दक्षिण भारत की संस्कृति को दुनिया के सामने रखता है। पोंगल का महत्व दक्षिण भारतीयों के लिए उसी तरह है जैसा उत्तर भारतीयों के लिए छठ पर्व।इस पर्व में भी चावल से बनी व्यंजन बनाये जाते है तो तमिलनाडु में जल्लीकट्टू नामक एक विशेष खेल का भी आयोजन किया जाता है। इसके साथ साथ तमिलनाडु में आज से ही नये साल की शुरूआत भी होती है।

पूर्वोत्तर में बिहू नाम से बनता है त्योहार

असम में बिहू पर्व हर्षोल्‍लास के साथ मनाया जा रहा है। असम के लोगों ने ईष्‍ट देव शबराई को घर में आमंत्रित किया है, इसके लिए घरों को रंगोली से सजाया गया है। इस दिन किसान फसल को पहली बार अपने घर लाते हैं। ईश्‍वर से सुख समृद्धि पाने के लिए इस त्‍योहार को असम के लोग प्रमुख पर्व के तौर पर देखते हैं। इस दिन मिठाईयां देकर दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों को बधाई दी जाती है और लोकगीतों पर लोकनृत्‍य की परंपरा निभाई जाती है।

देश के हर कोने में आज त्योहार का उत्सव साफ दिख रहा है और इस बार इन उत्सव में ज्यादा जोश भी दिख रहा है कारण कोरोना वैक्सीन जो कल से देश में लगने जा रही है। लेकिन कुछ भी ये त्योहार ही है जो भारत को अखंड भारत में पिरोये हुए है और विश्व में एक भारत श्रेष्ठ भारत की झलक दिखा रहे है।

 

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