भाषा और संस्कृति प्रेम का अद्भुत नमूना – अमेरिका में रह कर किया गीता का मैथिली अनुवाद

पंछी, नदिया, पवन के झोंके,
कोई सरहद न इसे रोके

जे पी दत्ता की फिल्म रिफ्यूजी के इस गीत का असली मतलब चरितार्थ किया है अमेरिका में रहने वाली काजल कर्ण ने| काजल ने भारतीय संस्कृति की अमित पहचान, “श्रीमद्भागवत गीता” का अपनी मातृभाषा मैथिलि में अनुवाद किया है|

Maithili translation of Gita
‘श्रीमद्भागवत गीता’ का मैथिलि संस्करण, काजल कर्ण द्वारा अनुवादित है|

यूँ तो श्रीमद्भागवत गीता का अनुवाद भारतीय भाषाओँ के साथ साथ विश्व की कई भाषाओँ में हो चुका है, लेकिन ऐसा पहली बार है की अमेरिका में किसी धार्मिक ग्रंथ का अनुवाद मैथिली भाषा में हुआ हो| ये अद्भुत कार्य किया है अमेरिका के टेक्सास में रहने वाली काजल कर्ण ने| काजल मूलतः जनकपुर (नेपाल) की रहने वाली हैं जहाँ माता सीता का मायका था, बिहार की राजधानी पटना में काजल का ननिहाल है| उनकी मातृभाषा मैथिलि है|

अपनी मातृभाषा ¬मैथिलि और मैथिल संस्कृति से प्रेम काजल के हृदय में कितना है ये इसी बात से जाना जा सकता है कि उन्होंने न सिर्फ अभी भगवद्गीता का मैथिलि में अनुवाद किया बल्कि अमेरिका में अपने पति के साथ मिलकर ‘मैथिली दिवा’ के नाम से ही एक संस्था चला रही हैं|

हिन्दुओं के सबसे पवित्र और सारगर्भित धर्मग्रन्थ माने जाने वाले श्रीमद भगवद्गीता के मैथिलि में अनुवाद की उपलब्धि के बारे में बात करते हुए काजल कर्ण ने मीडिया को बताया कि, “आज भले ही मैं अपने क्षेत्र से बहुत दूर, सात समुद्र पार हूँ, फिर भी मैं मिथिला की संस्कृति को नहीं भूली| अमेरिका में रह कर भी मैं मिथिला की कला-संस्कृति और मैथिली भाषा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने में लगी हुई हूँ|”

‘श्रीमद्भागवत गीता’ का मैथिलि संस्करण जो काजल कर्ण द्वारा अनुवादित है, आम लोगों के लिए अमेजन पर उपलब्ध है| फिलहाल इस अनुवाद को को अमेजन पर साढ़े चार रेटिंग मिली है| इस से पहले भी मैथिली के प्रख्यात साहित्यकार उपेंद्रनाथ झा ‘व्यास’ ने श्रीमद्भागवत गीता का मैथिलि में अनुवाद किया था| परन्तु आज की डिजिटल दुनिया में विदेश में रह कर भी काजल कर्ण द्वारा अपनी भाषा और संस्कृति के लिए इस प्रकार का योगदान अत्यंत सराहनीय है|