‘जादुई हथेली’, चंद सेकंड में बता देती है कोरोना जांच की रिपोर्ट

देश से अगर कोरोना को हराना है तो देश में इसके लिये टेस्टिंग को बहुत ज्यादा तेज करना होगा। खासकर केंद्र सरकार भी लगातार राज्य सरकार से इसी बात की अपील कर रही है। लेकिन जिस विधि से आज कोरोना के मरीज की जांच की जाती है वो थोड़ा ज्यादा वक्त लेती है। लेकिन इस बीच एक अच्छी खबर चेन्नई से आई है क्योकि वहां के केजे अस्पतालके शोधकर्ताओं ने हथेली के साइज की ऐसी डिवाइस का आविष्कार किया है। जिससे कुछ ही सेकंडों में व्यक्ति में कोरोना संक्रमण का पता चल जाता है। रिसर्चर का दावा है कि यह डिवाइस कुछ ही सेकंड में बॉडी टेंपरेचर, ऑक्सीजन के लेवल, ब्लड प्रेशन और ब्लड काउंट की जानकारी दे देती है।

वैज्ञानिकों ने बनाई जादुई हथेली

रिसर्चर के मुताबिक इस हथेलीनुमा डिवाइस में हाथ डालने पर यह काम करने लगती है। बिना किसी चुभन के इसमें लगी चिप आपकी हथेली को साथ लगे कंप्यूटर से अटैच कर देती है और कुछ ही सेकंड में सारे नतीजे स्क्रीन पर फ्लैश कर देती है। जबकि आरटी-पीसीआर टेस्ट में नतीजे आने में 6 घंटे लगते हैं। यह डिवाइस मानव शरीर में बनने वाली बेहद कम मात्रा की बिजली को मापने में सक्षम बताई जा रही है। आमतौर पर एक सामान्य व्यक्ति में 23 और 25 मिलियन वोल्ट बिजली होती है। हालांकि शोधकर्ताओं के निष्कर्षों में पता चला है कि साधारण वायरस से संक्रमित लोगों में बिजली की यह मात्रा केवल  20-22MV ही दिखती है। वहीं कोरोना संक्रमित लोगों में केवल 5-15MV रीडिंग ही दिखती है।

सेकंडों में बता देती है नतीजे

इस डिवाइस में लगे सेंसर लो ब्लड ऑक्सीजन सैचुरेशन, ब्लड प्रेशर, सफेद ब्लड सेल, रेड ब्लड सेल, प्लेटलेट काउंट और बुखार को भी काउंट करने में कामयाब रहते हैं। इस डिवाइस को तैयार करने वाली टीम का कहना है कि उसे ये आइडिया कैंसर रोगियों पर किए गए अध्ययन के दौरान सामने आया। उसमें कैंसर मरीज की बिजली की कंपन 68MV निकली थी। उससे पता चल रहा था कि रोगी को बुखार और शरीर में बन रही कोशिकाओं में गुणात्मक बढ़ोत्तरी तेज हो रही है। इतना ही नही इसे बनाने वाले वैज्ञानिक धीरजाशिव राज गोपाला और अरूण इंद्रबराज ने बताया है कि  चेन्नई में स्टैनली और ओमानंदुर अस्पतालों में आने वाले सैकड़ों रोगियों पर इस डिवाइसकी जांच की गई है। जिसमें करीब 98 फीसदी नतीजे सही आये है। वही इस मसीन को महज 10 हजार में तैयार किया गया है और इसे तैयार करने में करीब 15 महीने का समय लगा है टीम ने इस डिवाइस का पेटेंट करवाने के लिए अप्लाई कर दिया है अब देखना ये होगा कि इस विषम हालात में इसे कब तक प्रयोग में लाने के लिये हरी झड़ी मिल पाती है।

लेकिन इतना तय है कि अगर ये मशीन खरी उतरती है तो आत्मनिर्भर भारत में मेक इन इंडिया की एक और बड़ी छलांग साबित होगी।