छठे चरण में 7 राज्यों की 59 सीटों पर वोटिंग, भाजपा के सामने साख बचाने की चुनौती

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लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 7 राज्यों की कुल 59 सीटों पर 12 मई यानी रविवार को वोटिंग होनी है| इन सात राज्यों में बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, हरियाणा और दिल्ली शामिल हैं| लोकसभा चुनाव के इस चरण में बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में जहां यह वोटिंग का एक अन्य चरण होगा, वहीं दिल्ली और हरियाणा की सभी सीटों पर इस फेज में वोट डाले जाएंगे। इसके साथ ही रविवार को त्रिपुरा वेस्ट लोकसभी सीट के तहत 26 विधानसभा क्षेत्रों की 168 सीटों पर पुनर्मतदान भी होगा। त्रिपुरा वेस्ट में पहले चरण में यानी 11 अप्रैल को वोटिंग हुई थी लेकिन चुनाव आयोग ने उसे रद्द घोषित कर दिया था।

रविवार को होने वाले लोकसभा चुनाव के इस चरण में 7 राज्यों के करीब 10 करोड़ 16 लाख मतदाता अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल कर 979 उम्मीदवारों में से अपने पसंद का सांसद चुनेंगे।

2014 के पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कुल 35.8 फीसदी वोट शेयर के साथ इन 59 सीटों में से 44 सीटो पर जित दर्ज की थी| इस चरण में बीजेपी का वोट शेयर 2014 में उसके नैशनल वोट शेयर 31 प्रतिशत से करीब 5 प्रतिशत ज्यादा रहा था। लिहाजा, इस चरण में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसके खुद के सीट बचाने की है| इन 59 सीटों में से बीजेपी की सहयोगी पार्टी एलजेपी और अपना दल के 1-1, टीएमसी के 8, कांग्रेस के 2, एसपी के 2 और आइएनएलडी के भी 2 मौजूदा सांसद हैं।

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दिल्ली में इस बार के लोकसभा चुनाव बेहद रोचक है| कांग्रेस और AAP के बिच गठबंधन की बात न बनने की वजह से यहाँ मुकाबला त्रिकोणीय बन गया है| लिहाजा यहां बीजेपी, कांग्रेस और AAP के बीच त्रिकोणीय लड़ाई है। मालूम हो कि 2014 में बीजेपी ने दिल्ली की सभी 7 सीटों पर जीत हासिल कर लिया था। इसके साथ ही पड़ोसी हरियाणा की 10 लोकसभा सीटों के लिए भी रविवार को वोट डाले जाने है| 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हरियाणा के 7 लोकसभा सीटो पर जित दर्ज किया था| मालूम हो कि हरियाण में इसी साल बाद में विधानसभा चुनाव भी होने वाले है, इस लिहाज से यह चुनाव बेहद अहम् माने जा रहे है|

इस चरण में यूपी के पूर्वांचल की 14 लोस सीटो पर भी वोट डाले जाने है| जो गठबंधन, भाजपा और कांग्रेस तीनो ही के लिए बहुत ही अहम् है| भाजप ने पिछले चुनाव में इन 14 सीटो में से 12 सीटो पर जित हासिल किया था| लेकिन वोटो के गणित के सहारे गठबंधन अपनी जित को लेकर आश्वस्त है| तो वहीं, कांग्रेस को भी पूर्वांचल से काफी अपेक्षाएं है| कांग्रेस की इन सीटो पर अपेक्षाएं इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि जब 2009 में वह यूपी की 21 सीटों पर जीती थी तब उनमें से 18 सीटें अकेले पूर्वांचल की थीं| प्रियंका गाँधी के हाथो में बागडोर होने की वजह से इस बार कांग्रेस को इन क्षेत्रो में वापसी की उम्मीदें है|

इस चरण के चुनाव में सबसे हाई प्रोफाइल सीट भोपाल का है| जहाँ मुकाबला कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह और बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बीच है जो 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में आरोपी हैं। उधर झारखंड में भी सत्ताधारी बीजेपी को महागठबंधन से तगड़ी चुनौती मिल रही है जहां कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत 4 दल एक साथ हैं। लिहाजा यह देखना दिलचस्प होगा कि इस चरण के चुनाव में भाजपा अपनी सीटो को बरक़रार रख पाती है या नहीं!