3 मई तक बढ़ा लॉकडाउन, हफ्ते भर बाद मिल सकती है ढील

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पिछले 21 दिनों से जारी देशव्यापी लॉकडाउन को अब 3 मई तक बढ़ा दिया गया है | प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए इस बात की सुचना दी | प्रधानमंत्री ने कहा की आज हम कोरोना से लड़ाई मे अन्य देशों की तुलना मे काफी बेहतर स्थिति मे हैं | यही सही समय है जब हम कोरोना को पूरी तरह से नष्ट कर सकते हैं | अतः देश हित मे लॉकडाउन को कुछ दिनों के लिये बढ़ाना ही उचित होगा | हालाँकि प्रधानमंत्री ने इस बात की तरफ इशारा भी किया कि 20 अप्रैल के बाद कुछ ढील भी दी जा सकती है |

देश में लॉकडाउन का सबसे सख्त दौर 20 अप्रैल तक

मोदी सरकार देशभर में कोरोना के हॉटस्पॉट्स पर नजर रखेगी। देश में अभी 13 शहर हॉटस्पॉट हैं। 20 अप्रैल तक इन जगहों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी | 20 अप्रैल तक हर कस्बे, हर थाने, हर जिले, हर राज्य को बड़ी बारीकी से परखा जाएगा।

छूट मिलेगी, बशर्ते कोरोना के हॉटस्पॉट न बढ़े

देश के 718 जिलों में से 380 जिलों में कोरोना पहुंच चुका है। 104 जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इस बार बाहर निकलने के नियम बहुत सख्त होंगे। लॉकडाउन के नियम टूटे और कोरोना बढ़ा तो तुरंत सारी रियायतें वापस हो जाएंगी। छूट इसलिए दी जा रही है ताकि हर दिन की कमाई से अपना परिवार चलाने वाले काम पर लौट सकें। 

30 अप्रैल की जगह 3 मई तक लॉकडाउन क्यों?

कई राज्यों ने 30 अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ा दिया था। प्रधानमंत्री ने देशभर में टोटल लॉकडाउन को 30 अप्रैल की जगह 3 मई तक बढ़ा दिया है। माना जा रहा है कि उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि 1 मई को मजदूर दिवस का पब्लिक हॉलिडे है। महाराष्ट्र, जहां कोरोना के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं, वहां 1 मई को महाराष्ट्र दिवस की छुट्‌टी होती है। 2 मई को शनिवार और 3 मई को रविवार है। वीकेंड पर लॉकडाउन खुलता तो लोग बड़ी तादाद में बाहर निकलते। इसलिए 30 अप्रैल की जगह 3 मई तक लॉकडाउन रखा गया है।

भारत संभली हुई स्थिति में है 

मोदी ने कहा, ‘‘दुनिया के बड़े-बड़े देशों की तुलना में भारत बहुत संभली हुई स्थिति में है। महीना-डेढ़ महीना पहले कई देश कोरोना संक्रमण के मामले में भारत के बराबर खड़े थे, आज उन देशों में भारत की तुलना में कोरोना के मामले 25 से 30 गुना बढ़ गए हैं। उन देशों में हजारों लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है। भारत ने पुलिसिंग अप्रोच, इंटिग्रेटेड अप्रोच न अपनाई होती, समय पर तेज फैसले नहीं लिए होते तो आज भारत की स्थिति क्या होती, इसकी कल्पना करते ही रोएं खड़े हो जाते हैं।’’


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