चलो स्कूल से-पढ़ो ऑनलाइन की ओर बढ़ रहा भारत

 

कहा जाता है कि बड़ी विपत्ति कई बार बड़े सुधार का आधार खड़ा कर जाती है। कुछ ऐसा ही देश की शिक्षा व्यवस्था को लेकर देखा जा रहा है। वर्तमान में  ज़रूर  कोरोना ने स्कूली और उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए परेशानी खड़ी की है, लेकिन जिस तरह देश धीरे-धीरे चलो स्कूल से-पढ़ो ऑनलाइन की ओर बढ़ रहा है, उससे शिक्षा जगत एक नये कल की तरफ चलता दिख रहा है।

शिक्षा सेक्टर में नये युग की दस्तक

कोरोना माहामारी को लेकर देश में कई सवाल खड़े हो रहे थे कि हम कैसे काम करेंगे सबकुछ थम जायेगा लेकिन शिक्षा के सेक्टर को लेकर ऐसा तो बिलकुल भी नही देखा गया। कोरोना ने कितना भी लोगों को ताले में बंद कर दिया हो लेकिन ज्ञान के प्रकाश को वो आज भी  नही रोक पाया है। जिसे लेकर भविष्य के नये सपने बुने जा रहे हैं, भारत जैसे देश में वैसे भी ऑनलाइन शिक्षा की जरूरत है, क्योंकि देश में अब भी एक बड़ी आबादी ऐसी है, जो गरीब होने के साथ अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच से दूर है। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा के जरिये अब वह भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल कर सकेगी। ऑनलाइन शिक्षा से जुड़े लोगों की मानें तो देश में ऑनलाइन शिक्षा को आगे बढ़ाने का मकसद ही यही था कि सभी वर्ग के लोगों तक शिक्षा की आसान पहुंच बन सके।

क्या ये व्यवस्था लायेगी रंग ?

बहरहाल आज भी यह सवाल खड़ा है कि क्या आमने-सामने गुरु-शिष्य की पढ़ाई का विकल्प ऑनलाइन बन सकता है? क्या बच्चों की जिज्ञासा शांत हो रही है? भारत जैसे देश में जहां बिजली से लेकर इंटरनेट तक की उपलब्धता और स्पीड हमेशा सवालों के घेरे में है वहां क्या ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प उचित है- ऐसे कई सवाल हो सकते हैं। यह भी तय है कि औपचारिक स्कूली शिक्षा चलती रहेगी, लेकिन ऑनलाइन शिक्षा की जो शुरुआत हुई है अब उसे थामना मुश्किल है। वैसे भी स्कूली शिक्षा से जुड़े करीब 25 करोड़ और उच्च शिक्षा से जुड़े करीब आठ करोड़ बच्चों को ऑनलाइन से जोड़ पाना बहुत बड़ी चुनौती है। लेकिन आज सरकार इस चुनौती को स्वीकार कर रही है और इसका निदान भी निकाल रही है।

लेकिन इतना तो तय है कि इस व्यवस्था से  खासकर उन बच्चों के लिए जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और पढ़ना भी चाहते हैं, लेकिन उन्हें बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है, उनको बहुत फायदा होने वाली है। अब ऑनलाइन शिक्षा के जरिए वे देश के सबसे योग्य शिक्षकों से जुड़कर पढ़ सकेंगे। इसके लिए उन्हें न तो पैसा खर्च करना होगा और न ही घर छोड़कर पढ़ाई के लिए दूर कहीं जाना होगा। इस तरह पढ़ाई आसान हो जाएगी। इस बात को भी कोई गलत नही कह सकता है; हां ये जरूर है कि लॉकडाउन के बाद भी इस व्यवस्था को ठीक तरह से लागू रखा जाये जिससे ये वैकल्पिक व्यवस्था की जगह एक प्रमुख व्यवस्था बन सके और देश के बच्चे इसका फायदा उठा सकें।