लेह बना भारत का सबसे बड़ा जिला

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जम्मू कश्मीर और लद्दाख का नया नक्शा31 अक्टूबर को विधिवत रूप से जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख के दो केन्द्रशासित प्रदेशों में पुनर्गठन के बाद गृह मंत्रालय द्वारा जारी भारत के नए नक़्शे के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुकाबले लद्दाख का क्षेत्रफल बड़ा है, लेकिन उसके पास केवल दो जिले हैं। इन दो जिलों में लेह और करगिल शामिल हैं। क्षेत्रफल की दृष्टि से देखा जाए तो लेह अब भारत का सबसे बड़ा जिला बन गया है। हालांकि, लेह का एक हिस्सा पाकिस्तान और एक हिस्सा चीन के कब्जे में है।

उल्लेखनीय है कि इसी वर्ष 5 अगस्त को मोदी 2.0 ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया था और जम्मू और कश्मीर का पुनर्गठन कर देश में एक प्रधान और एक विधान का लक्ष्य पूर्ण किया था| 31 अक्टूबर 2019 को लौह पुरुष सरदार पटेल के जन्मदिवस पर इस योजना का आधिकारिक रूप से कार्यान्वयन किया गया| अब देश में कुल मिलाकर 28 राज्य और 9 केन्द्रशासित प्रदेश हो गए हैं|

बता दें कि इसके पहले क्षेत्रफल के मुताबिक भारत का सबसे बड़ा जिला गुजरात का कच्छ होता था। लेकिन भारत के नए नक्शे के अनुसार अब भारत का सबसे बड़ा जिला लेह होगा।

गृह मंत्रालय के अनुसार, 1947 के भूतपूर्व जम्मू-कश्मीर राज्य में 14 जिले थे। ये जिले थे कठुआ, जम्मू, ऊधमपुर, रियासी, अनंतनाग, बारामूला, पुंछ, मीरपुर, मुज़फ़्फ़राबाद, लेह और लद्दाख़, गिलगित, गिलगित वजारत, चिल्हास और ट्राइबल टेरिटॉरी।

फिर 2019 तक आते-आते भूतपूर्व जम्मू और कश्मीर की राज्य सरकार ने इन 14 ज़िलों के क्षेत्रों को पुनर्गठित करके 28 ज़िले बना दिए थे। नए जिलों के नाम हैं – कुपवाड़ा, बांदीपुर, गांदरबल, श्रीनगर, बड़गाम, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, राजौरी, रामबन, डोडा, किश्तवाड़, साम्बा और कारगिल।

गौरतलब है कि भारत का नया नक्शा सर्वेअर जनरल ऑफ़ इंडिया ने तैयार किया है। इस नक्शे में दोनों नए केंद्र शासित प्रदेशों के तहत गिलगित-बाल्टिस्तान और पाक प्रशासित कश्मीर के हिस्सों को भी दिखाया गया है। भारत सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सुपरविजन में जम्मू कश्मीर और लद्दाख की सीमा को निर्धारित किया गया है। भारतीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी देश के नए नक़्शे का पडोसी देश पाकिस्तान ने विरोध किया है। भारत के अभिन्न हिस्सों पर अवैध रूप से कब्ज़ा जमाये हुए देश पाकिस्तान द्वारा कानून की बात और इसका विरोध करना हास्यास्पद लगता है।

 


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