छोड़ो कल की बातें कल की बात पुरानी, स्वदेशी के साथ लिखनी है मिलकर नई कहानी

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अगर देखा जाये तो कोरोना और भारत के बीच चल रही जंग में भारत का पलड़ा अभी भारी है। क्योंकि मोदी सरकार ने कोरोना से लोगों की जान के साथ साथ देश की आर्थिक हालात को भी दूसरे मुल्कों के तुलना में काफी बचाया है। लेकिन इस बीच एक बार फिर से स्वदेशी बनाम विदेशी को लेकर चर्चा जोरों पर है। लेकिन इस बार स्वदेशी को बढ़ावा देने का मतलब विदेशी सामानो का बहिष्कार नही है बल्कि उनसे टक्कर लेने के लिए आत्मनिर्भर होने की तैयारी है।

‘Local के लिए Vocal’ का मतलब दुनिया से नाता तोड़ना नहीं

स्वदेशी को बढावा देने के लिये जो पीएम मोदी ने आम लोगों से अपील की है उसका कुछ लोग गलत मतलब निकाल रहे हैं। लेकिन हम आपको बता दें कि इस बार लोकल को बढ़ावा देने के लिये विदेशी कंपनियों का बहिष्कार नही है बल्कि विदेशी कंपनियों को मेक इन इंडिया का रंग चढ़ाकर ये दिखाना है कि देश में विदेशी कंपनियां बेहतर कर सकती है और उन्हें सरकार की तरफ से बेहतर माहौल देने का भी प्रयास किया जा रहा है। भारत एक ऐसा देश है जहां टैक्स को सरल किया गया है और विश्व में सबसे कम टैक्स लिया जाता है। मतलब ये है कि पीएम मोदी ने ये बताने की कोशिश की है कि  हम अपने उत्पादनों को ज्यादा बढ़ायेंगे साथ ही विदेश से आई कंपनियों को भारत में रहकर सामान बनाने पर बल देंगे जिससे देश में रोजगार बढ़ सके तो दूसरी तरफ देश का रॉ मिटीरियल यूज हो जिससे छोटे उघमियों को फायदा पहुंच सके। इस नई सोच से ही देश में आने वाले वक्त में हम नये भारत का निर्माण करेंगे जिससे भारत विश्व में आर्थिक तौर पर एक शक्तिशाली देश बनकर उभरेगा।

स्वदेशी ने विश्व में बचाई है पहले भी धूम

स्वदेशी उत्पादनों पर यूँ तो जोर आजादी के बाद से ही दिया जाने लगा था। लेकिन इसका स्वर जरूर 70 सालों तक धीमा रहा। लेकिन मोदी सरकार के आते ही मेक इन इंडिया को चमकाने के लिए बड़ी बड़ी योजनाओं को शुरू किया गया जिसका असर ये हुआ कि देश में रक्षा, स्वास्थ, विज्ञान के क्षेत्र में नये आयाम गढ़े। जहां देश में एक मोबाइल नही बनता था, वहां आज 200 कंपनियां देश में ही मोबाइल बना रही है। जहां देश में एक पीपीई किट तैयार नही होती थी, वहां भारत हर दिन 2 लाख किट तैयार कर रहा है, बल्कि विदेश में निर्यात भी कर रहा है। ये सब हुआ है तो सिर्फ स्वेदेशी को बढ़ावा देने के चलते बस फर्क इतना हुआ कि पहले देश में बनाने पर जोर दिया जाता था अब विदेशी कंपनियों को देश में बुलाकर बनाने के लिये जोर दिया जाता है। जिसके चलते देश में रोजगार तो बढ़ा बल्कि देश उत्पादन करने में भी आगे बढ़ने लगा। आज आलम ये है कि भारत विश्व में दूसरे नबंर पर स्टील का उत्पादन कर रहा है। तो विश्व में सबसे सस्ता सेटेलाइट लॉन्च भारत में होता है तभी विश्व के कई देश भारत से सेटेलाइट को लॉन्च कर रहे हैं। ये भी पूरी दुनिया ने देख लिया है कि भारत ने सबसे सस्ता मंगलयान बनाया है।  ऐसे में हमारे पास प्रतिभा की कमी नही है बस हौंसला चाहिये जो कोरोना काल ने हमे दिया है। जिसका हम भरपूर फायदा  उठाकर देश को आगे ले जाएंगे।

मतलब साफ है कि आने वाले दिनों में अब हमें पुरानी बाते छोड़कर लिखनी होगी फिर से नई कहानी जिसका लोहा विश्व मानेगा और भारत फिर से सोने की चिड़िया कहलाने का दर्जा प्राप्त कर लेगा। इसके लिये पीएम मोदी जी ने हमे रास्ता दिखा दिया है। उस पर चलने के लिये आर्थिक सहायता भी दे दिया है। बस अब हमे अपने हौंसले के दम पर इस रास्ते में आने वाले काँटों को खत्म करके फूल ही फूल बिछाने हैं।


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