LCH हेलीकॉप्टर दुश्मन के लिए साबित होगी किलर मशीन

चिनूक, राफेल ने चीन और पाक की नींद खराब कर रखी है तो अब दोनो दुश्मन मुल्क का सुकून भी छीनने की तैयारी कर ली गई है। इसी क्रम में  वायु सेना प्रमुख ने बेंगलुरू में HAL के बनाये गए लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर LCHका जायजा लिया और साथ ही उड़ान भी भरी। जानकारो की मानें तो हाई ऑल्टीटियूड वॉरफेयर में LCH अपाचे से भी ज्यादा प्रभावी हैं।

दुनिया का सबसे हल्का अटैक हेलीकॉप्टर

वायु सेना अधिकारियों के मुताबिक ये दुनिया का सबसे हल्का अटैक हेलीकॉप्टर है। इसका ताकत का नमूना सियाचिन में लैंडिंग के साथ दिख गया था। जो काम दुनिया का सबसे एडवांस्ड हेलीकॉप्टर अपाचे नहीं कर सकता वो LCH ने कर दिखाया था। इसके लगभग 3 महीने बाद वायु सेना प्रमुख की इस उड़ान ने दुनिया को ये बता दिया है कि आने वाले समय में ये लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर आधिकारिक तौर पर भारतीय वायु सेना का हिस्सा होंगे। LCH  सियाचिन के कई टेस्ट में 500 किलोग्राम के हथियार ले जाने में कामयाब रहा है। अपाचे की तुलना में कम वज़न के हथियारों से लैस LCH ऐसी भौगोलिक चुनौतियों और खराब मौसम वाली स्थितियों में भी दुश्मन को खत्म करने का दम रखता है। LCHदुनिया के सबसे हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर हैं, जो भारतीय सेना की ज़रूरतों को ध्यान में रखकर विशेष रूप से बनाए गए हैं। इसलिए जब-जब दुश्मन पूरब या पश्चिम की इन आसमानी ऊचाइयों पर चढ़ कर भारत पर वार करने की सोचेगा तब-तब उसके हर इरादे को LCH खाक में मिला देंगे।

LAC पर अगस्त में हो चुका है तैनात

भारत के लिए LCH हाई ऑल्टीड्यूड वॉरफेयर में क्यों अहम हो गया है, इसे जानने के लिए आपको तीन महीने पीछे जाना होगा। चीन से चल रही तनातनी के बीच भारत ने अपने पहले स्वदेशी अटैक हेलीकॉप्टर LCH को LAC पर तैनात कर दिया था। इन अटैक हेलीकॉप्टर्स की तैनाती को हर कोई हैरत भरी निगाह से इसलिए देख रहा था, क्योंकि ना तो ये अबतक आधिकारिक रूप से भारतीय वायु सेना से जुड़े हैं और ना ही ये भारतीय सेना के सबसे एडवांस हेलिकॉप्टर्स हैं। ऐसे में सबके होंठों पर सवाल था कि अमेरिकी अपाचे से पहले LCH की तैनाती क्यों की गई। दरअसल भारत के पास इस वक्त मौजूद अमेरिका का एएच-64 अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर दुनिया में सबसे आधुनिक तो है लेकिन LCH ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों यानी कि हाई ऑल्टीट्यूड वॉरफेयर में जंग लड़ने के लिए अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर से ज्यादा घातक है। हाई ऑल्टीट्यूड वॉरफेयर में LCH की रेंज ज़्यादा लंबी है। लद्दाख बॉर्डर 18000 फीट तक की ऊंचाई पर भी है। ऐसे इलाकों और बर्फीले मौसम में रोटरी विंग्स वाले अपाचे को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन बेहद लाइट यानि हल्का होने और खास रोटर्स होने के चलते एलसीएच इतनी ऊंची चोटियों पर भी अपने मिशन को अंजाम दे सकता है।

जिस तरह से ये हेलीकॉप्टर दुनिया में भारत की शक्ति को बता रहा है और ये दर्शा रहा है कि भारत अब किसी से कम नही है तो दूसरी तरफ भारत के दुश्मन के दिलो की धड़कन भी बढ़ा रहा है कि अगर भारत की तरफ से गलत नियत से देखा तो अंजाम बहुत बुरा होगा क्योकि नये भारत की ताकत अब बहुत ज्यादा ताकतवर हो गई है।