अब कोरोना योद्धाओं पर हमला करनेवालों को जाना होगा 7 साल के लिये जेल

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कोरोना वायरस महामारी के दौरान देश में डॉक्टरों और नर्सों पर हमले को देखते हुए सरकार उनकी सुरक्षा के लिए एक अध्यादेश लाई है। नरेंद्र मोदी कैबिनेट की बैठक में आज 123 साल पुराने कानून में बदलाव करने का फैसला किया गया और हेल्थकर्मियों के लिए अध्यादेश लाने का फैसला किया गया। इस अध्यादेश के तहत डॉक्टरों और अन्य हेल्थकर्मियों पर हमला करने वालों को अधिकतम 7 साल तक की सजा हो सकती है।

कोरोना वॉरियर्स पर हमला बर्दाश्त नहीं

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि अध्यादेश को राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा गया है, जिसके बाद यह कानून बन जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कानून में प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक अब अगर डॉक्टर या किसी भी हेल्थ वर्कर पर हमला किया जाता है तो इसे संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा। इसके तहत अधिकतम 7 साल तक की सजा और 5 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।

शाह से हुई थी डॉक्टरों की बात

जावड़ेकर ने बताया कि आज सुबह की गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय स्वास्थ मंत्री हर्षवर्धन ने मेडिकलकर्मियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी। डॉक्टरों ने मांग की थी कोरोना काल में उनकी सुरक्षा के लिए सरकार कानून लाए। गृह मंत्री ने उन्हें भरोसा दिया था कि डॉक्टरों और नर्सों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने कहा कि NSA, IPC, CRPC होने के बावजूद यह अध्यादेश लाने का फैसला किया गया।

गंभीर मामले में 7 साल तक की सजा और दोगुना जुर्माना

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 123 साल पुराने कानून में बदलाव करते हुए डॉक्टरों पर हमला करना को बर्दाश्त नहीं करने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा कि गंभीर चोट के मामलों में हमला करने वालों को 6 महीने से 7 साल तक की सजा हो सकती है। ऐसे मामलों में जुर्माना 1-5 लाख तक होगा। गाड़ी या क्लीनिक का नुकसान करने पर बाजार रेट से दोगुना नुकसान हमलावारों से वसूल किया जाएगा।

कोरोना से निपटने के लिए क्या-क्या कदम

जावड़ेकर ने साथ ही बताया कि सरकार ने कोरोना संकट से निपटने के लिए अबतक क्या-क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि देश में कोविड-19 के 723 अस्पताल बने हैं। इसके अलावा 1 लाख 86 हजार आइसोलेशन बेड तैयार हैं। 24 हजार ICU और 12,190 वैंटिलेटर तैयार है। उन्होंने कहा कि कोरोना का पहला मरीज मिलने के तीन महीने के भीतर इन सेवाओं का विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि जहां तक पीपीई की बात है, पहले हमारे पास एक भी फैसिलिटी नहीं थी। आज 77 घरेलू कंपनियां पीपीई बना रही हैं। 1 करोड़ 88 लाख पीपीई का ऑर्डर है। 25 लाख एन-95 मास्क उपलब्ध हैं और ढाई करोड़ का ऑर्डर दिया गया है।

 


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