वोकल फॉर लोकल मुहीम को मजबूती देता लाल चंदन का कारोबार

पीएम मोदी लगातार अपने भाषणो में ये कहते हुए नजर आते है कि देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमे देश में होने वाली वस्तुओं के उत्पादन में इजाफा करना होगा जिससे विश्व में हमारे सामान का एक अलग बाजार खड़ा हो सके। पीएम मोदी की इसी सोच को आगे बढ़ा रहा है देश में होने वाला लाल चंदन जिसे हम रक्त चंदन भी कहते है जो आज दक्षिण भारत के कई जिलो में रहने वालो का जीवन बदल रहा है।

भारत को मिला प्राकतिक वरदान

लाल चंदन को रक्त चंदन के नाम से भी जाता है। चंदन तीन तरह का होता है सफेद, रक्त यानि लाल और पीत यानि पीला चंदन। पूजा पाठ में चंदन के इस्तेमाल का महत्व सभी जानते हैं लेकिन भारत में उगने वाले लाल चंदन यानी रक्त चंदन की बात ही कुछ और है। रक्त चंदन में सफेद चंदन की तरह सुगंध नहीं होती है। दुनिया में इसकी भारी मांग की वजह ये भी है कि भारत का ये ‘लाल सोना’ आयुर्वेद में औषधि के रूप में अनगिनत तरीकों से उपयोग में लाया जाता है। रक्त चंदन के ये पेड़ दक्षिण भारत के शेषाचलम को छोड़ कहीं नहीं उगते। ये सिर्फ तमिलनाडु की सीमा से लगे आंध्र प्रदेश के चार जिलों- नेल्लोर, कुरनूल, चित्तूर, कडप्पा में फैली शेषाचलम की पहाड़ियों में ही रक्त चंदन के पेड़ उगते हैं। लाल चंदन के पेड़ की औसत ऊंचाई 8 से लेकर 12 मीटर तक होती है। इसकी लकड़ी पानी में डूब जाती है। जो इसकी सबसे प्रमुख पहचान है। कोरोना काल में वापस लौटे लोगो ने पीएम मोदी की अपील पर इस तरफ रूख करते हुए इस व्यवस्या में कदम रखा जिसके बाद आज महज 8 महीने में इस व्यवसाय में करीब 20 फीसदी का इजाफा देखा जा रहा है।

रक्त चंदन के अनगिनत फायदे

लाल चंदन अधिक गुणकारी होता है। लाल चंदन का उपयोग सुंदरता निखारने में होता है। यह स्‍किन पिगमेंटेशन और मुंहासे जैसी कई त्वचा से जुड़ी परेशानियों का इलाज करता है। एक्जिमा के कारण होने वाली सूजन, जलन और खुजली से राहत पाने के लिए लाल चंदन पाउडर को कपूर के साथ मिलाकर पेस्ट बना कर इस्तेमाल करें तो इसके चमत्कारी परिणाम देखने को मिलते हैं।गंध को सूंघने की क्षमता केवल नाक में ही नहीं होती। त्वचा की कोशिकाओं में चंदन की खुशबू सूंघने के तत्व मौजूद होने की खोज हुई है। यानी लाल चंदन हर तरह से अनमोल और सहेज कर रखने योग्य है।महंगे फर्नीचर, सजावट के काम के लिए भी रक्त चंदन की लकड़ियों की काफी डिमांड है। इसके साथ ही शराब और कॉस्मेटिक्स में भी इसका इस्तेमाल होता है। इंटरनेशनल मार्केट में इसकी कीमत करोड़ों तक पहुंचती है। इसलिए भारत पर रक्त चंदन के पेड़ों की सुरक्षा की जिम्मेदारी है।

इसलिए तड़पता है चीन

लाल चंदन की लकड़ी की विदेशों में खासकर चीन में भारी मांग है लेकिन जैसे जैसे इसकी ख्यति विश्व में फैल रही है वैसे ही विश्व का एक बड़ा बाजार अब भारत से इसे खरीद रहा है जबकि पहले चीन इसे खरीदकर समूचे विश्व में सप्लाई करके हमशे ज्यादा मुनाफा कमाता था। लेकिन पीएम मोदी के वोकल फॉर लोकल अभियान के चलते आज भारत इस ओर एक बड़ा कारोबारी देश बनकर उभर रहा है।

कोरोना काल में देश का कारोबार आगे बढ़े इसके लिए मोदी जी ने देश को एक मंत्र वोकल फॉर लोकल का दिया था जिसे देशवासियों ने अपने गले उतार लिया है जिसके बाद देश के लोगो की आय तो बढ़ रही है साथ ही साथ देश भी मजबूत हो रहा है।