ऐसा प्रत्याशी, जिसके पास न तो नकदी है, न ही बैंक बैलेंस, चुनाव-दर-चुनाव हो रहा और गरीब

• उत्तरप्रदेश के मुज़फ्फरनगर से लोकसभा प्रत्याशी मांगेराम कश्यप, साल 2000 से लगातर चुनाव लड़ते आ रहे है|
• चुनाव-दर-चुनाव मांगेराम की संपत्ति कम होती जा रही है|
• साल 2000 में मांगेराम ने एक पार्टी बनाई, जिसका नाम ‘मजदूर किसान यूनियन पार्टी’ हैं|
• मांगेराम कश्यप पैदल ही चुनाव प्रचार करते है|

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अमूमन ऐसा होता है कि चुनाव दर चुनाव नेताओ के संपत्ति में वृद्धि होती है| लेकिन इस लोकसभा चुनाव में एक प्रत्याशी ऐसा भी है जिसकी संपत्ति चुनाव दर चुनाव कम ही होती जा रही है| इस प्रत्याशी के पास न तो नकदी है, न जेवर और न ही बैंक बैलेंस, हर चुनाव के साथ यह प्रत्याशी और भी गरीब हो जाता है| हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब किसी लोकसभा चुनाव में ऐसे अजीबो-गरीब प्रत्याशी की नाम सामने आ रही है| हर चुनाव में हर बार कोई ऐसा प्रत्याशी चुनावी मैदान में होता ही है, जिसकी कहानियाँ काफी रोचक होती है| इस बार ऐसे ही उत्तरप्रदेश के मुज़फ्फरनगर से लोकसभा प्रत्याशी है मांगेराम कश्यप, मांगेराम वर्ष 2000 से लगातार चुनाव लड़ते आ रहे है|

एक तरफ जहाँ चुनाव लड़ने वाले नेताओ के लिस्ट में करोड़पति उम्मीदवारों की लम्बी लिस्ट है| वहीं, दुसरे तरफ पेशे से वकील मांगेराम कश्यप के न तो खुद के बैंक अकाउंट में एक भी रुपया है और न ही उनकी पत्नी के| इसके इतर तमाम संसाधनों के न रहने के बावजूद मांगेराम साल 2000 से लगातार चुनाव लड़ रहे है| अब जब मांगेराम फिर से लोकसभा चुनाव 2019 के लिए चुनाव मैदान में है| तो उन्होंने नामांकन के वक़्त अपने द्वारा दायर हलफनामे में बताया कि ना उनके पास नकदी है, ना बैंक में एक भी रुपया है और ना ही जेवर हैं।

हलफनामे में उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया है कि उनके पत्नी बबिता चौहान के पास भी कोई नकदी नहीं है| इसके साथ ही उनके बैंक में भी जीरो बैलेंस है और उनके पास भी कोई जेवर नहीं हैं। हलफनामे के मुताबिक करीब 5 लाख रुपये कीमत से एक 100 वर्गमीटर का प्लॉट उनके पास है। इसके अलावा 15 लाख रुपये का एक घर है। ख़ास बात यह है कि यह घर भी भी मांगेराम को ससुराल की तरफ से गिफ्ट में मिला है। मांगेराम के पास कुछ अपना है तो वो है, 36 हजार रुपये कीमत की एक बाइक|

दरअसल, 51 वर्षीय मांगेराम ने साल 2000 में खुद की पार्टी बनाई थी| जिसका नाम था, ‘मजदूर किसान यूनियन पार्टी’| पार्टी बनाने के बाद से ही मांगेराम ने हर आम चुनाव में अपनी पार्टी के प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में कदम रखा| मांगेराम कहते है कि, पार्टी के साथ करीब 1000 लोग जुड़े है, जिनमे से अधिकांश मजदूर है|

ऐसे दौर में जब बड़ी-बड़ी गाडियों के काफिले के साथ नेता चुनावी रैलियों को संबोधित करने जाते है| ठीक ऐसे ही दौर में मांगेराम ऐसे प्रत्याशी है, जो लोगो के बीच पैदल ही अपने चुनावी प्रचार को धार देते है| इस सन्दर्भ में एक निजी मीडिया एजेंसी से बात-चित में मांगेराम ने कहा कि, ‘मेरे पास बाइक है लेकिन हर रोज पेट्रोल के लिए पैसे नहीं हैं। मेरी पत्नी गृहणी हैं और मेरे दो बच्चे हैं। मुझे परिवार का भी ख्याल रखना है। मैंने कोई और नौकरी की तलाश की थी लेकिन मेरे मुताबिक कोई और नौकरी नहीं मिली।’ मांगेराम ने इसी सन्दर्भ में आगे बताया कि, ‘पिछले चुनावों में भी मैंने पैदल ही प्रचार किया। लोगों से मैंने खुद के लिए वोट की अपील की। मुझे कई बार आश्चर्य होता है कि बड़े नेता चुनाव प्रचार पर इतना खर्च क्यों करते हैं जबकि इन पैसों को लोगों के हित में लगाया जा सकता है।’

मांगेराम कश्यप ने हर आम चुनाव में डोर-टू-डोर कैम्पेन कर अपने पक्ष में वोट के लिए अपील किया, लेकिन इसका फायदा उन्हें कभी नसीब नहीं हुआ| नतीजतन, हर चुनाव में उनकी जमानत जब्त हो गयी| लेकिन इस सबके बावजूद इस बार लोकसभा चुनाव को लेकर मांगेराम काफी उत्साहित है, वो इस बात को लेकर आश्वस्त है की इस दफा उनकी स्थति काफी अलग और मजबूत रहेगी| उनका कहना है कि, ‘इस साल चीजें मेरे हित में होंगी।’ इतना ही नहीं मांगेराम इस बात से भी बेफिक्र हैं कि उनके सामने बीजेपी के संजीव बालियान, कांग्रेस से नरेंद्र कुमार और महागठबंधन से अजित सिंह उम्मीदवार हैं। उनका कहना है कि, ‘वोटर जानते हैं कि ये राजनेता उनके लिए कुछ नहीं करते हैं। यह सवाल पूछे जाने पर की वो अगर चुनाव जीतते है, तो उनके पास आम जनता के हितो के लिए क्या रोडमैप है| इस सवाल के जवाब में मांगेराम कहते है कि, मैं गरीबों की सहायता करूंगा। मैं एक मतदाता पेंशन योजना का प्रस्ताव करूंगा ताकि किसी को पैसे की जरूरत ना रहे।’ ऐसे में जब मांगेराम कश्यप इस दफा अपने जित को लेकर आश्वस्त है तो यह देखना दिलचस्प होगा कि, उनकी स्थिति कैसी बनकर उभरती है|