खुश रहना देश के प्यारों, अब हम तो सफर करते हैं – सुषमा स्वराज

Sushma Swaraj funeral

सुषमा स्वराज, भारत की राजनीती का एक ऐसा नाम जिसे किसी परिचय की ज़रुरत नहीं है, ये वो नाम है जो अपने आप में ही एक आदर्श और मजबूत राजनीती और महिला शशक्तिकरण की पहचान है | बीते रात जब ये खबर आई की भारत की ये असाधारण नेता नहीं रही तब से भारत की जनता शोक में डूबी हुई है | देश का माहौल गमगीन हुआ है क्योंकि अब सब के मन में यही बात है की सुषमा स्वराज के रूप में हमने एक बहुत बेशकीमती रत्न खो दिया और जो अब हमें कभी वापस नहीं मिलने वाला है |

सुषमा स्वराज इंसानियत, कर्तव्यनिष्ठ, और शशक्त महिला की बेमिशाल उदहारण थी | वो जितनी बेहतरीन नेता थी उतनी ही बेहतरीन इन्सान भी | पहली महिला मुख्यमंत्री, पहली महिला विदेशमंत्री, प्रथम महिला प्रवक्ता और न जाने कितने ही कीर्तिमान इनके नाम है | लोगों के मदद के लिए भी सुषमा हमेश तत्पर रहती थी |

1952 में अम्बाला छावनी में जन्मी सुषमा स्वराज में भारतीयता की भावना भरी हुई थी | स्वराज 90 के दशक में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुडी और 1975 में वो जॉर्ज फ़र्नान्डिस के विधिक टीम का हिस्सा भी बनी | स्वराज पेशे से एक वकील भी थी | देश में आपातकाल के समय उन्होंने जयप्रकाश नारायण के सम्पूर्ण क्रांति में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया और आपातकाल का पुरजोर विरोध किया | इसके बाद स्वराज जनता पार्टी का हिस्सा बनी | स्वराज के नाम 25 साल में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने का रिकॉर्ड भी दर्ज है | 1979 में 27 वर्ष की स्वराज हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की राज्य अध्यक्ष भी बनी | 80 के दशक में जब भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ तब सुषमा भी इसमें शामिल हो गयी | 1990 में स्वराज को राज्यसभ सदस्य निर्वाचित किया गया | इसके बाद 1996 में स्वराज दक्षिण दिल्ली संसदीय से चुनाव जीतकर 13 दिन के वाजपयी सरकार में बतौर सुचना एवं प्रसारण मंत्री नियुक्त की गयी | 1998 में स्वराज ने एक बार फिर दक्षिण दिल्ली संसदीय से चुनाव जीता और फिर सुचना एवं प्रसारण मंत्री की शपथ ली | अपने इस कार्यकाल के दौरान फिल्म उद्योग को एक उद्योग के रूप में घोषित करनास्वराज के प्रसंसनीय फैसलों में एक था जिससे कि भारतीय फिल्म उद्योग को भी बैंक से क़र्ज़ मिल सकता था |

1998 में ही स्वराज नें केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया और उसी साल 12 अक्टूबर को दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी पर बहुत जल्द ही उन्होंने अपने राज्यसभा सीट से भी इस्तीफा दे दिया | इसके बाद साल 1999 में स्वराज कर्नाटक के बेल्लारी निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के विरुद्ध चुनाव लड़ा जहाँ उन्हें बहुत ही कम मार्जिन से हार का सामना करना पड़ा | इसके बाद साल 2000 में स्वराज ने उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में कम बैक किया | इसके बाद साल 2009 में स्वराज ने मध्य प्रदेश के विदिशा लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीता और लोकसभा की संसद चुनी गयी | 21 दिसंबर 2009 को लालकृष्ण आडवाणी की जगह 15वि लोकसभा में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता बनायीं गयी | इसके बाद साल 2014 में जब पहली बार देश में मोदी सरकार बनी तब सुषमा स्वराज को एक बार फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया और देश की पहली महिला विदेश मंत्री के तौर पर नियुक्त किया गया |

जब सुषमा स्वराज विदेश मंत्रालय संभल रही तब उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिनसे लोगों को मदद मिली | गीता वो लड़की जो अपने परिवार से बिछड़कर पाकिस्तान पहुँच गयी थी उसके परिवार को खोजने के लिए भी स्वराज ने मुहीम चलायी और आखिर में गीता को उसके परिवार से भी मिलवाया | इसके साथ ही उन्होंने विदेशों में फसे भारतियों को मुश्किलों से निकलने के लिए मुहीम चलाया और उन्हें सुरक्षित वापस भारत लेकर आई | अपने विदेश मंत्री रहने के दौरान उन्होंने पाकिस्तान भी हर बार हर अन्तराष्ट्रीय सम्मलेन में पूरा विरोध किया था | संयुक्त राष्ट्र के मंच से भी उन्होंने पाकिस्तान और आतंकवाद के रिश्तों पर पाकिस्तान को खूब खरी खोटी सुनाई थी और चेतावनी भी की अगर पकिसत्न नहीं सुधरता है तो उसे रस्ते पर लाने के लिए जो बन पड़ेगा भारत वो करेगा | अपने दमदार भाषण से उन्होंने पाकिस्तान को भी मौन धारण करने पर मजबूर कर दिया था |

एक महिला होकर भी स्वराज अपनी बातों को और विचारों को व्यक्त करने में जरा भी नहीं हिचकती थी | कई बार तो उन्होंने संसद में भी मनमोहन सिंह और लालू यादव जैसे दिग्गज नेताओं के बेतुके सवालों का करार जवाब देकर मौन धारण करने पर मजबूर कर दिया |

आज स्वराज हमारे बीच नहीं है | कुछ ही समय में उनका पार्थिव शरीर पंच्तत्व में विलीन हो जायेगा | पर उनकी विचारधारा और उनकी निडर अंदाज़ को हमेशा ही याद किया जायेगा |