पिछले पाँच सालों में कुल कपड़ा उत्पादन में खादी का शेयर दुगुना – ये है मोदी मैजिक

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इसे मोदी का मैजिक कहें या स्वदेशी को प्राथमिकता देने की मोदी की नीति, लेकिन पिछले पाँच सालों में देश के कुल कपडा उत्पादन में खादी से बने कपड़ों का शेयर साल 2014-15 के मुकाबले 2018-19 में दुगुना हो गया| जहाँ साल 2014-15 में कुल कपडा उत्पादन में खादी से बने वस्त्रों का योगदान 4.23% था वहीँ 2018-19 में बढ़ कर ये 8.49% हो गया है| खादी ग्रामोद्योग कमीशन ने ये आंकड़े पिछले सप्ताह जारी किये|

खादी ग्रामोद्योग कमीशन के अनुसार 2014-15 में कुल मिल फैब्रिक उत्पादन 2,486 मिलियन स्क्वायर मीटर था, और खादी का योगदान 105.38 मिलियन स्क्वायर मीटर था, लेकिन इसके मुकाबले 2018-19 में कुल मिल फैब्रिक उत्पादन 2,012 मिलियन स्क्वायर मीटर हुआ, और खादी का योगदान 170.80 मिलियन स्क्वायर मीटर हो गया|

खादी के बढ़ते उत्पादन और इसके उपयोग की लोकप्रियता के बारे में बात करते हुआ खादी ग्रामोद्योग मिशन के चेयरमैन, विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि, “खादी के उत्पादन के दुगुना होने के पीछे, प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खादी को अपनाना और देश की जनता से खादी अपनाने की अपील करना एक बड़ा कारण है|” उन्होंने आगे कहा कि, “खादी ग्रामोद्योग तथा सूक्ष्म , लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा नयी नीतियों के अपनाने से खादी उद्योग में काम करने वाले कामगारों और दक्ष लोगों की संख्या बढ़ी है|”

खादी के क्षेत्र में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए तथा मृतप्राय खादी उद्योग को नयी दिशा देने के लिए सरकार ने नयी इकाइयों का रजिस्ट्रेशन स्टार्ट किया| साथ ही कारीगरों पर केन्द्रित कई सारी योजनायें शुरू की गयी जिसके अंतर्गत अब तक करीब 32,000 नए मॉडल के चरखे तथा 5,600 मॉडर्न लूम वितरित किये गए|

प्रधानमंत्री ने खादी को एक नयी पहचान दी है| खुद खादी को अपनाकर उन्होंने अंतर्राष्टीय स्तर पर खादी की लोकप्रियता को बढ़ाया है| आज मोदी के खादी वस्त्रों को अपनाने की होड़ हर उम्र के नागरिकों में है| इसे मोदी का मैजिक नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे|