पहली बार केदारनाथ में दर्शनों के लिए नहीं लगेगी लंबी लाइन

kedranath Temple

चारधाम की यात्रा करने वाले श्रध्दालुओं के लिए अच्छी खबर है। इस बार केदारनाथ धाम के दर्शनों के लिए उन्हें लंबी कतार में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। प्रशासन और मंदिर समिति ने इस बार दर्शनार्थियों के लिए नई व्यवस्था की है, इसके तहत दर्शन के लिए श्रध्दालुओं को टोकन उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे पहले यात्रियों को केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ता था। इससे महिलाओं और बच्चों को बहुत परेशानी होती थी। टोकन की यह व्यवस्था नौ मई से शुरू हो जाएगी। उत्तराखंड के गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलने से शुरू होते ही चार धाम यात्रा का शुरुआत हो होगी। 7 मई को इस बार यात्रा का शुभारम्भ गंगोत्री और यमनोत्री के कपाट खुलने से होने जा रहा हैं। केदारनाथ धाम के कपाट 9 मई को और बद्रीनाथ धाम के दर्शन 10 मई से हो सकेंगे|

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इस बार सर्दियों में हुई भारी बर्फबारी ने यात्रा की तैयारियों को कई बार बाधित किया। बर्फ के कारण खासतौर से केदारनाथ धाम में काफी नुकसान हुआ। इस कारण यहां रुकने के इंतजाम पर भी असर पड़ा है। इसलिए इस बार केदारनाथ धाम में एक समय में अधिकतम एक हजार श्रद्धालु ही रुक सकेंगे। धाम के पास ही बने एक पड़ाव पर पांच सौ यात्री ही रूक पाएंगे, जबकि गौरीकुंड में आठ हजार भक्तों इंतजाम होगा। केदारनाथ की यात्रा पर आने वाले भक्तों की निजी गाड़ियों को भी इस बार गौरीकुंड तक नहीं आने दिया जाएगा। इन वाहनों को 6 किलोमीटर पहले सोनप्रयाग में ही रोक दिया जाएगा। हर साल लगभग 25 लाख भक्त यहां चारधामों में दर्शनों के लिए आते हैं।

यात्रियों की सुरक्षा के लिए इस बार भी फोटोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन के लिए 36 सेंटर्स बनाए गए हैं। यात्रा की शुरुआत ऋषिकेश से होती है। इसलिए सबसे प्रमुख केंद्र यहां पर बनाया गया है। इसके अलावा हरिद्वार, दोबाटा, बड़कोट, फाटा, सोनप्रयाग, जोशीमठ, पांडुकेश्वर सहित कई अन्य स्थानों पर भी यात्री रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। किसी भी तरह की दुर्घटना होने पर प्रशासन को सटीक जानकारी मिल सकती है। मौसम खराब होने पर या कोई अन्य जानकारी पहुंचाने के लिए रजिस्टर किए गए नंबरों पर सूचनाएं भेजी जा सकती हैं। साल 2013 की भीषण आपदा के बाद इस व्यवस्था को बनाया गया।

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साथ ही आपको बता दें कि उधर, हेमकुंड में अब भी 13 फुट तक बर्फ जमी हुई है। हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के लिए अभी इस वजह से रास्ता घांघरिया से आगे बंद है। सेना के जवान घांघरिया में बर्फ हटाने के काम में लगे हुए हैं। घांघरिया से हेमकुंड तक दो अस्थाई पुल भी बनने हैं। सेना के जवानों के साथ गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पदाधिकारियों ने बर्फ पर चलकर हेमकुंड तक का सफर तय किया।

हेमकुंड गुरुद्वारा सहित लक्ष्मण मंदिर और हेमकुंड सरोवर भी बर्फ से ढका हुआ है। 1 जून से हेमकुंड की यात्रा शुरू होनी है और उससे पहले बर्फ काटकर रास्ता बनाया जाना है। उधर, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में यात्रा की तैयारियां के लिए व्यवस्था दुरस्त की जा रही हैं।