घाटी में विकास की राह पर कश्मीरी युवा, शमीम ने मेडिकल तो सुरेश ने सिविल सेवा में गाड़े झंडे

Kashmiri youth, Suresh buried flags in civil service

हम सभी जम्मू और कश्मीर की स्थिति से अवगत हैं। कठिन परिस्थिति के कारण, यहाँ के लोगों, विशेषकर युवाओं, को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म होने के बाद एक तरफ केंद्र सरकार वहां विकास में तेजी लाने के सभी संभव प्रयास कर रही है। वहीं राज्य के युवा भी राज्य में मुश्किल हालात और आतंकवाद को पार पाकर कामयाबी का परचम लहरा विकास की राह पर बढ़ने को तैयार हैं। कुछ समय पहले तक यहां के लोगों, खासकर युवाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में यहां के युवा अपनी कठिन परिस्थितियों से पार पाकर मंजिल हासिल कर रहे है , ऐसी एक सुकून वाली खबर आ रही हैं।

कश्मीर के युवा विकास की राह पर हैं और इसका सबसे बड़े उदाहरण हैं राजौरी जिले के इरमीम शमीम और उधमपुर के सुरेश सिंह।बता दें कि, इरमिम शमीम ने जून में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की प्रवेश परीक्षा पास कर ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। तो वहीं दूसरी तरफ सुरेश सिंह ने कश्मीर प्रशासनिक सेवा में 10 वीं रैंक प्राप्त की है।

सीमावर्ती जिले के धनोर गांव की रहने वाली इरमिम शमीम की राह काफी मुश्किल भरा था। उन्हे स्कूल जाने के लिए हर दिन 10 किलोमीटर की पैदल दूरी तय करनी पड़ती थी। गांव में कोई अच्छा स्कूल नहीं था। यही नहीं पिछड़े समुदाय से ताल्लुक रखने वाली शमीम काफी गरीब परिवार से आती है, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत से न सिर्फ उसने तमाम बाधायों को तोड़ कर इस प्रमुख संस्थान में प्रवेश पा लिया है। शमीम ने एम्स की प्रवेश परीक्षा पास कर ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। जानकारी अनुसार एम्स में दाखिला लेने वाली वह जिले की पहली गुर्जर महिला है।

दूसरी तरफ उधमपुर के सुरेश एक बुक-बाइंडर है, जिसने प्रशासनिक सेवा में 10 वीं रैंक प्राप्त की है। इस सफलता को लेकर सुरेश ने कहा कि यह लंबी प्रक्रिया थी, लेकिन वे हार नहीं माने और लगातार प्रयास करते रहे। उन्होंने अपने पिता को अपना प्रेरणास्रोत बताया। सुरेश सिंह ने कहा कि यह उनका ही सपना था कि मुझे अच्छी नौकरी मिले। इसलिए मैंने उनके सपने को पूरा करने के लिए दिन-रात पढ़ाई की।

बता दें कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यहां जन-जीवन धीरे धीरे पटरी पर लौट रही है।