कश्मीर: महिला कमांडो ने सिर्फ 10 मिनट में तीन आतंकियों का कर दिया काम तमाम

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जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में सुरक्षाबलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। यहां सीआरपीएफ के 73 बटालियन की कमांडेंट संतो देवी ने एक बहादुरी भरा कारनामा करते हुए एक ऑपरेशन में तीन आतंकियों को मार गिराया। हालांकि, इस ऑपरेशन में सेना के एक जवान भी शहीद हो गए। जिन आतंकियों को मारा गया इनकी तलाश सेना को काफी दिनों से थी और जब बुधवार की सुबह इनके बारे में सीआरपीएफ को सूचना मिली तो ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

दरअसल, श्रीनगर के बाहरी इलाके में बुधवार सुबह 11 बजे के आसपास सीआरपीएफ के जवानों ने एक स्कूटर को रुकने का इशारा दिया। इस स्कूटर पर तीन लोग सवार थे और जवानों को जो सूचना मिली थी, उसके मुताबिक यही तीन लोग थे जिसकी तलाश की जा रही थी।

लेकिन इससे पहले कि जवान इन तीनों पर काबू पाते स्कूटर के सबसे पीछे बेठे खतीब ने अपनी पिस्टल से सीआरपीएफ जवान रमेश रंजन के सिर में गोली मार दी। नाके पर तैनात संतो देवी ने तुरंत मोर्चा संभाला और 2 आतंकियों को वही मार गिराया जबकि एक घायल हो गया लेकिन अस्पताल में उसने भी दम तोड़ दी। इस पुरे ऑपरेशन को शुरू और खत्म करने में मात्र 10 मिनट का समय लगा। आतंकियों के पास से दो पिस्टल और दो ग्रेनेड बरामद किए गए हैं।

जम्मू कश्मीर पुलिस के डीजीपी ने दावा किया है कि मारे गये तीनों आंतकी अलग-अलग संगठनों के थे, जिसमें एक-एक आतंकी आईएस, हिज्बुल और लश्कर का है और वो इकट्ठे काम कर रहे थे। लेकिन आईएस के दावे पुलिस की थ्योरी को गलत बता रहे है।

बिहार के आरा के रहने वाले थे शहीद जवान

इस मुठभेड़ में सीआरपीएफ का एक जवान रमेश रंजन शहीद हो गया, जो भोजपुर, बिहार के रहने वाले थे। बताया गया कि सीआरपीएफ की 73वीं बटैलियन में तैनात रमेश रंजन की उम्र लगभग 31 साल थी। रंजन की मौत के बाद श्रीनगर के सीआरपीएफ कैंप में उनको अंतिम विदाई दी गई। जानकारी के मुताबिक, उनके पार्थिव शरीर को एयरलिफ्ट करके पहले दिल्ली लाया जाएगा फिर उनके पैतृक निवास (बिहार) को भेजा जाएगा।

गौरतलब है कि जिन आतंकियों को मारा गया इनकी तलाश सेना को काफी दिनों से थी और जब बुधवार की सुबह इनके बारे में सीआरपीएफ को सूचना मिली तो ऑपरेशन को अंजाम दिया गया।

संतो देवी ने किया ऑपरेशन को लीड

श्रीनगर के बाहरी इलाके लवायपोर ऑपरेशन की अगवाई सीआरपीएफ की 73वीं बटालियन की कमांडेंट संतो देवी कर रही थीं। संतो देवी हरियाणा की रहने वाली है और पिछले 33 सालों से सीआरपीएफ में तैनात हैं। संतो देवी के अनुसार इस पूरे ऑपरेशन को शुरू और खत्म होने मे बस दस मिनट का समय लगा, लेकिन इसमें उनकी कम्पनी के एक जवान भी शहीद हो गए।

बता दे कि संतो देवी इससे पहले भी शोर्य का प्रदर्शन कर चुकी हैं। 2005 में अयोध्या में राम लल्ला परिसर पर हुए आतंकी हमले को विफल करने वाली टीम का भी वह हिस्सा थीं, लेकिन बुधवार का हमला उनके लिए ज़िंदगी का सबसे बड़ा और कठिन ऑपरेशन रहा।

 


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