कारगिल बैटल स्कूल – जहाँ तैयार होते हैं पहाड़ी युद्ध में माहिर जांबाज़

Kargil Battle School

भारतीय सेना देश का एक ऐसा अंग है, जिस पर पुरे देशवासियों को फक्र है| हर मुश्किल में और हर परिस्थिति में, चाहे वो रेगिस्तान की तपती गर्मी हो, या सियाचिन की कड़ाके की ठण्ड, हमारी सेना देश की सुरक्षा के लिए हमेशा तत्पर है| लेकिन देश की रक्षा हेतु पूरी तरह तैयार होने के लिए सेना के एक-एक जवान को बहुत कड़ी ट्रेनिंग से गुजरता पड़ता है|

क्या आपको पता है कि हमारे देश में एक ऐसा स्कूल भी है जहाँ पर सेना को दुश्मनों को मुहतोड़ जवाब देने के हर दाव-पेंच सिखाये जाते हैं| उसके साथ ही हर परिस्थिति में खड़े रहने की ट्रेनिंग भी दी जाती है| आइये जानते है इस स्कूल के बारे में:

कारगिल बैटल स्कूल – कश्मीर के द्रास में स्थित

कारगिल बैटल स्कूल नाम से जाना जाने वाला यह स्कूल कश्मीर के द्रास सेक्टर में स्थित है| इसकी स्थापना कारगिल युद्ध के एक साल बाद यानि साल 2000 में की गयी थी| इस स्कूल के निर्माण के पीछे एक ही मकसद था कि सेना के जवानों को इस तरह से तैयार किया जाये कि वह ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों पर, जहाँ ऑक्सीजन की कमी है वहां भी आसानी से रह सकें| इस स्कूल में जवानों को खास तौर से पहाड़ों पर युद्ध लड़ने के लिए तैयार किया जाता है, और कई तरह की स्पेशल टेक्निक्स के बारे में भी बताया जाता है|

Soldiers after completing a training in the Kargil Battle School in Dras in Jammu and Kashmir

इस स्कूल के अधिकारियों से बातचीत पर जानकारी मिली कि यहाँ पर सेना को 10 हजार से 18 हजार फीट तक की पहाड़ियों पर ऑपरेशन को अंजाम देने की ट्रेनिंग दी जाती है| सेना की यह ट्रेनिंग लगभग तीन हफ्ते तक होती है| जवानों को यहाँ सिखाये जाने वाले टेक्निक्स में 90 डिग्री चढ़ाई, रैपेलिंग, एसॉल्ट क्लाइंबिंग रॉक आदि सम्मिलित हैं| बीते कुछ सालों में इस जगह के इंफ्रास्ट्रक्चर को सेना के लिए और भी अच्छा बनाया गया है ताकि उन्हें अपनी ट्रेनिंग में किसी भी प्रकार की रुकावट न झेलनी पड़े|

सबसे बड़ी बात ये है कि सेना के जवान अपनी पूरी मेहनत और ईमानदारी से इस ट्रेनिंग को पूरा करते हैं, ताकि वो देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हो सकें और दुश्मनों की हर नापाक हरकत को पूरी प्रबलता के साथ रोकने में सक्षम हों|